रात्रि में गौशालाओं का करें औचक निरीक्षण, सहभागिता योजना में दिए गए गोवंशों का करें सत्यापनदूध निकालने के बाद ग्रामों में ना छोडे़ जाए गौवंश

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रात्रि में गौशालाओं का करें औचक निरीक्षण, सहभागिता योजना में दिए गए गोवंशों का करें सत्यापनदूध निकालने के बाद ग्रामों में ना छोडे़ जाए गौवंश

Friday, January 12, 2024 | January 12, 2024 Last Updated 2024-01-12T11:53:36Z
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रात्रि में गौशालाओं का करें औचक निरीक्षण, सहभागिता योजना में दिए गए गोवंशों का करें सत्यापन
दूध निकालने के बाद ग्रामों में ना छोडे़ जाए गौवंश


बदायूँ : 12 जनवरी। विकास भवन सभागार में गोवंश संरक्षण प्रगति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए विशेष सचिव परिवहन व नोडल अधिकारी खेमपाल सिंह ने अधिकारियों से कहा कि वह रात्रि में गौशालाओं का औचक निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि गायों को दूध निकालने के बाद चारे के लिए


 ग्रामों में ना छोड़ा जाए इस हेतु जनजागरूकता और प्रचार प्रसार कराएं। उन्होंने गौ-संरक्षण में जनपद में कराए गए कार्यों की प्रशंसा की व सभी को बधाई भी दी।


 उन्होंने जनपद में नंदियों के लिए आश्रय स्थल बनाए जाने के लिए भी कहा।
जनपद के गौ-संरक्षण के लिए नोडल अधिकारी व विशेष सचिव परिवहन उत्तर प्रदेश शासन खेमपाल सिंह ने कहा कि कोई भी गोवंश निराश्रित ना रहे यह हम सब की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उन्हें आज किए गए


भ्रमण में जंगल में कोई भी गोवंश घूमता हुआ नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि स्वतः मूल्यांकन सबसे अच्छा होता है इसलिए अधिकारी व कार्मिक अपने किए गए कार्यों का स्वतः मूल्यांकन करें।


 उन्होंने उपस्थित सभी खंड विकास अधिकारियों व अधिशासी अधिकारी नगर निकायों से कहा कि वह सहभागिता योजना अंतर्गत दिए गए गोवंशों का सत्यापन नियमित रूप से करें। उन्होंने कहा कि चारागाह में नेपियर ग्रास या जलवायु व मिट्टी के हिसाब से उसमें फसल बोई जाए तथा चारागाह के चारों ओर वृक्षारोपण भी कराया जाए।

उन्होंने गौशालाओं में पुआल बिछाने व पर्दे लगाने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि गौशालाओं को स्वावलंबी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जो गोवंश संरक्षित है वह संरक्षित होने के साथ-साथ सुरक्षित भी रहता है। उन्होंने कहा कि बड़ा चारागाह को चिन्हित कर वहां नंदियों का आश्रय स्थल भी बनाया जाए।



मुख्य विकास अधिकारी केशव कुमार ने गौ-संरक्षण में जनपद की प्रगति आख्या रखते हुए बताया कि गत 01 नवंबर से 31 दिसंबर तक अभियान चलाया गया। अभियान में दस्ते बनाकर 5710 गोवंश को पकड़कर संरक्षित किया गया। उन्होंने बताया कि जनपद में 276 गौशालाएं हैं

 जिनमें से 268 की जिओ टैगिंग की जा चुकी है शेष 08 की प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में गौशालाओं की स्थापना व संरक्षण में जनपद बदायूं अग्रणी जिलों में आता है। जनपद में 35989 गोवंश संरक्षित हैं।


 उन्होंने बताया कि जनपद में 221 चारागाह चिन्हित है जिनमें से 115 को खाली कर लिया गया है व उसकी मैपिंग भी कर ली गई है शेष पर कार्यवाही जा रही है। जनपद में 12 कैटल कैचर है। सहभागिता योजना में शासन ने 30 रुपए प्रति गोवंश प्रतिदिन को बढ़ाकर 50 रुपए प्रति गोवंश प्रतिदिन कर दिया है।

उन्होंने बताया कि जनपद में 6376 गोवंश सहभागिता योजना अंतर्गत गौपालकों को सौंपे गए है। उन्होंने बताया कि जनपद की 1037 ग्राम पंचायत में 286 क्लस्टर बनाए गए हैं। हर क्लस्टर में एक गौशाला हो इस पर कार्य किया जा रहा है।

 उन्होंने जनपद अमरोहा के लिए एक टीम बनाकर वहां गोबर से मूर्ति बनाने के कार्यां को देखेंगे और समझेंगे।
इस अवसर पर अपर जिला अधिकारी प्रशासन वीके सिंह, समस्त उप जिलाधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी मोहर सिंह सहित अन्य अधिकारी गण उपस्थित रहे।
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