भारतीय किसान यूनियन चढूनी का धरना 11वें दिन भी जारी: प्रशासन की उदासीनता और अधिकारियों की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

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भारतीय किसान यूनियन चढूनी का धरना 11वें दिन भी जारी: प्रशासन की उदासीनता और अधिकारियों की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

Monday, October 19, 2026 | October 19, 2026 Last Updated 2026-10-19T14:23:38Z
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संवाददाता कौशल पाराशरी यूपी हेड 

भारतीय किसान यूनियन चढूनी का धरना 11वें दिन भी जारी: प्रशासन की उदासीनता और अधिकारियों की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

बदायूं, 18 अक्टूबर l भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के बैनर तले मालवीय आवास गृह पर जिलाध्यक्ष सतीश साहू के नेतृत्व में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को 11वें दिन में प्रवेश कर गया। प्रशासन की उदासीनता और स्थानीय अधिकारियों की लचर कार्यशैली के चलते किसानों और आम जनता में भारी रोष व्याप्त है। धरने के माध्यम से मुख्य रूप से दो गंभीर मामलों में न्याय की गुहार लगाई जा रही है, लेकिन 11 दिन बीत जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सुधि न लेना प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
प्रमुख समस्याएं, जिन पर प्रशासन साधे हुए है चुप्पी:
भूमि विवाद और धोखाधड़ी का मामला (ग्राम जैनुईया, बदायूं तहसील)
पीड़ित पक्ष: प्रेमवती एवं भगवान दास विवरण: प्रेमवती की यह समस्या बदायूं तहसील की ग्राम पंचायत बुटला दौलत के मजरा जैनुईया से जुड़ी है। प्रेमवती व भगवान दास ने रामदुलार से एक जमीन का सौदा तय किया था, जिसका प्रथम इकरारनामा (एग्रीमेंट) भी कराया गया था।
अधिवक्ता व कानूनी मोड़: समय रहते बैनामा न करने पर पीड़ितों ने कानूनी औपचारिकता पूरी कर न्यायालय में वाद दायर किया। लेकिन इसी बीच, उसी भूमि का बैनामा गजराज के नाम कर दिया गया, जिससे यह जमीन पूरी तरह विवादित हो गई है। पीड़ित पक्ष इस मामले में न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
दूसरा मामला शहर का है जहां पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और आम रास्ता बंद करने का मामला (नई सराय, बदायूं शहर) पीड़ित पक्ष: दिलशाद अब्बासी, शरीफ अब्बासी एवं स्थानीय मोहल्लावासी (9 अक्टूबर से धरने पर बैठे हैं) नई सराय बीएसएनएल ऑफिस के पास डॉ. शारिक जनाब द्वारा आम रास्ते पर बने नाले को बंद कर दीवार खड़ी की जा रही है।
सरकारी भूमि पर अवैध तरीके से अतिक्रमण कर कब्जा किया जा रहा है, जिससे आम जनमानस को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
नाला बंद होने के कारण घरों का गंदा पानी निकलना बंद हो गया है, जिससे पूरे मोहल्ले में जलभराव और गंभीर संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
रास्ता अवरुद्ध होने से आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
प्रशासन की निष्क्रियता: ताज्जुब की बात यह है कि सरकारी जमीन पर हो रहे इस अवैध कब्जे के खिलाफ जब जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाई, तब भी जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह मौन साधे बैठे हैं। जनता की पीड़ा सुनने के लिए कोई भी प्रशासनिक अधिकारी धरना स्थल पर नहीं पहुंचा है।
चेतावनी: भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के नेतृत्व में चल रहा यह धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण और जनहित के मुद्दों पर आधारित है। यदि प्रशासन ने जल्द ही इन दोनों मामलों का ठोस समाधान नहीं निकाला, तो संगठन को मजबूरन अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करना पड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
एक नजर में खास बातें:
प्रदर्शन स्थल: मालवीय आवास गृह, बदायूं
सतीश साहू जिलाध्यक्ष, ( चढूनी) ने कहा 
11 दिन से अनिश्चितकालीन धरना जारी
मांग: भूमि विवाद का निष्पक्ष निपटारा और सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण एवं नाला बंदी पर तत्काल रोक।
धरने में प्रमुख रूप से उपस्थित लोग:
इस विरोध प्रदर्शन और धरने के दौरान संगठन के पदाधिकारी और स्थानीय नागरिक भारी संख्या में डटे हुए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—
शरीफ अब्बासी, कल्लू, कृष्ण अवतार शाक्य, प्रेमवती, भगवान दास, बियुसु दास, अजीम मिस्त्री, नूरुद्दीन, जुबेर अब्बासी, इसरार खां, इरशाद खां आदि लोग मौजूद रहे।
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