संवाददाता कौशल पाराशरी यूपी हेड
बदायूँ: भाकियू (चढ़ूनी) का 9 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना जारी; जमीन विवाद और सरकारी नाले-रास्ते पर कब्जे को लेकर भड़के किसान
— खसरा नंबर 975 के विवादित हिस्से के अवैध बैनामे और कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद प्रशासनिक चुप्पी पर उठाए सवाल
— BSNL दफ़्तर के पीछे 8 फीट चौड़े आम रास्ते व नाले को बंद करने का आरोप; पुलिस-लेखपाल के जाते ही फिर शुरू हो जाता है अवैध निर्माण
बदायूँ। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के तत्वावधान में गत 9 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। धरना स्थल पर संगठन के पदाधिकारियों ने प्रशासनिक उपेक्षा पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए दो प्रमुख जनसमस्याओं को लेकर जिला प्रशासन के खिलाफ हुंकार भरी।
विवादित जमीन का अवैध बैनामा, कोर्ट में मुकदमा लंबित
धरने को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष सतीश साहू ने बताया कि ग्राम पंचायत बुटला दौलत के मजरा जनुईया निवासी प्रेमवती पत्नी छोटेलाल व भगवान दास पुत्र विजई ने खसरा नंबर 975 में से 1/18 और 1/18 भाग (लगभग तीन लोगों से) जमीन खरीदने हेतु रजिस्ट्रीशुदा इकरारनामा कराया था। नियमानुसार समय रहते बैनामा कराने के लिए नोटिस भी दिए गए, जिसके बाद मामला वर्तमान में न्यायालय सिविल जज (जूनियर डिवीजन) में विचाराधीन है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 से यह जमीन प्रेमवती के कब्जे में चली आ रही है। आरोप है कि ₹40,000 की पेशगी पर रामदुलार द्वारा इस विवादित जमीन का अवैध रूप से बैनामा गजराज के नाम कर दिया गया। जिला अध्यक्ष ने अफसोस जताया कि इस प्रकरण के समाधान के लिए लगातार धरना दिए जाने के बावजूद आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने मामले का संज्ञान नहीं लिया है।
BSNL दफ़्तर के पीछे सरकारी आम रास्ते व नाले पर कब्जे की कोशिश
वहीं, जिला प्रभारी कृष्ण अवतार शाक्य ने शहर की एक गंभीर समस्या को उठाते हुए कहा कि बदायूँ शहर में BSNL कार्यालय के पीछे 8 फीट चौड़ा एक सरकारी आम रास्ता है, जिसके साथ पानी की निकासी के लिए एक नाला भी बना हुआ है जिसमें पूरी आवासीय बस्ती का पानी बहता है।
आरोप है कि डॉ. शरीक जनाब द्वारा सरकारी रास्ते और नाले को बंद करने की नीयत से रास्ते को दबाकर और दीवार लगाकर अवैध कब्जा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में कई बार पुलिस, नायब तहसीलदार और लेखपाल द्वारा मौके पर पहुँचकर निर्माण कार्य रुकवाया जा चुका है, लेकिन प्रशासनिक टीम के वापस लौटते ही पुनः निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाता है। इससे प्रतीत होता है कि इस अवैध कब्जे में किसी न किसी सरकारी मशीनरी का हाथ है। प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने से स्थानीय निवासियों के सामने आवागमन और जलभराव का संकट खड़ा हो गया है।
धरना स्थल पर ये मौजूद
बीयीशु दास, लईक अब्बासी, दिलशाद अब्बासी, यादवेंद्र सिंह, नूरुद्दीन, शरीफ, भगवान दास, प्रेमा, परवेज, बादशाह, कल्लू, जुबैर, अबरार, सुभान, मुनव्वर, नौशाद, इस्लाम रजा, ताहिर अब्बासी, शरीफ अब्बासी, फैज अब्बासी, अरमान अब्बासी, आजम अब्बासी और अजीम मिस्त्री सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता व स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।