देश के 16 करोड़ युवक युवतियों को स्काउट्स प्रशिक्षण अनिवार्य

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देश के 16 करोड़ युवक युवतियों को स्काउट्स प्रशिक्षण अनिवार्य

Wednesday, March 23, 2022 | March 23, 2022 Last Updated 2022-03-23T09:23:56Z
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देश के 16 करोड़ युवक युवतियों को स्काउट्स प्रशिक्षण अनिवार्य

          एल टी मनोज सिन्धी

जिस प्रकार से विश्व विश्व युद्ध की ओर जा रहा है ।हमे अपने देश के युवक युवतियों को देश के सबसे सस्ते संघटन हिंदुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स से प्रशिक्षण करा कर देश को आने वाली चुनोतियो से बचाया जा सकता है ।यह बहुत ही सोचनीय प्रश्न है हमारा देश सबसे अधिक युवावों का देश है लेकिन युवावों को स्काउट्स प्रशिक्षण से वंचित किया गया है जब भी किसी देश पर संकट आता है वहाँ के स्काउट्स अपने देश के लिए जान तक खेलकर जान माल की सुरक्षा करते है ।
    विश्व पटल पर स्काउट्स का प्रदार्पण भी एक ऐसे युद्ध को लेकर हुआ था । जब बोर युद्ध मे सैनिकों की कमी पड़ी तो बेडेन पावेल ने युवावों को ट्रैनिंग दी थी उस संघटन का नाम स्काउट्स रखा गया था उनके कारण इस युद्ध को जीत नया कीर्तिमान स्थापित किया था उसके बाद स्काउट्स का प्रशिक्षण इंग्लैंड के प्रत्येक बच्चे के लिए लागू किया गया था इससे युवावों को शारीरिक,मानसिक ,बौद्धिक रूप से मजबूत कर देश भगति की भावना से ओतप्रोत किया जा सकता है ।


आतंकवाद से निपटने के लिए देशभर के युवाओं का स्काउट्स की तर्ज पर अनिवार्य हो प्रशिक्षण
आतंकवाद और अलगाववाद से निपटने तथा देश की आंतरिक व बाहरी सुरक्षा के लिए यह प्रशिक्षण आवश्यक है ।

एल टी मनोज सिन्धी रीजनल ऑर्गनाइजिंग कमिश्नर एवं राज्य सचिव उत्तर प्रदेश हिंदुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स ।
आज बेबाकी से अपनी राय रख रहे है । आज के समय मे देश के अंदर एवं बाहर ऐसी विपरीत हवाये चल रही है इसे रोकने में युवक युवतियों को प्रशिक्षित कर इस समस्याओं से निजात पाया जा सकता है ।

पड़ोसी देशों की चुनौतियों के प्रति सतर्कता : भारतीय सुरक्षा परिवेश पर नजर डाली जाए तो यह तथ्य उभर कर सामने आता है कि न तो हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं और न ही सीमा के अंदर का क्षेत्र। आज भारत के समक्ष सुरक्षा चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में अधिक सजग रहने की आवश्यकता है। इस सजगता की जरूरत तब तक बनी रहेगी, जब तक दक्षिण एशिया में भारत के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पड़ोसी देशों पाकिस्तान व चीन द्वारा हथियारों की प्रतिस्पर्धा समाप्त नहीं की जाती या फिर इन देशों के साथ भारत के आपसी संबंध मधुर नहीं बनते। दूसरी तरफ देश के अंदर फैला आतंकवाद जन-जन की सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है। कहने का तात्पर्य यह है कि भारत का प्रत्येक नागरिक असुरक्षा की परिधि में आ चुका है और यह असुरक्षा की परिधि तभी समाप्त हो सकती है, जब भारत का हर नवयुवक सुरक्षा के लिए न केवल कुशल तरीके से प्रशिक्षित हो, बल्कि अपनी व अपने देश की सुरक्षा करने में सक्षम हो।
     स्काउट्स की तर्ज पर अनिवार्य प्रशिक्षण : विदित हो कि वर्ष 2014 में राज्यसभा सांसद अविनाश राय खन्ना ने एक निजी विधेयक के जरिये कहा था कि रूस और इजरायल की तर्ज पर भारत के किशोरों व युवाओं को भी अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। साथ ही स्कूल में 10वीं स्तर तक के पाठ्यक्रम में भी स्काउट्स प्रशिक्षण को शामिल किया जाना चाहिए। इस विधेयक के जवाब में तब के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि यह योजना अच्छी है, लेकिन फिलहाल इस पर अमल करना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि आर्थिक कारणों से देश के करीब 16 करोड़ किशोरों को अनिवार्य प्रशिक्षण देने की योजना को अमल में नहीं लाया जा सकता है। उन्होंने यह जरूर कहा कि सीमावर्ती इलाकों के किशोरों को सैन्य प्रशिक्षण देने का प्रयोग किया जा सकता है। मार्च 2018 में संसद की रक्षा मामलों की स्थायी समिति ने इस बात की सिफारिश की थी कि केंद्र व राज्य की सरकारी नौकरियों के लिए पांचवर्षीय सैन्य सेवा अनिवार्य कर दी जाए। इसके पीछे एक उद्देश्य यह भी था कि इससे सेना में जवानों व अधिकारियों की कमी भी पूरी हो जाएगी।


आतंकवाद और अलगाववाद से निपटने की गंभीर चुनौती : उल्लेखनीय है कि वर्तमान में संसार के सभी देश अपनी सजगता का परिचय देते हुए अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए निरंतर युद्ध की तैयारियों में प्रयत्नशील हैं और कई देशों ने वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति के कारण ऐसे महाविनाशक हथियारों का निर्माण कर लिया है, जिनकी मदद से समस्त धरा को क्षणभर में ध्वस्त किया जा सकता है। वहीं दूसरी तरफ आतंकवाद और अलगाववाद की जड़ें इतनी गहराई तक पहुंच चुकी हैं कि उन्हें उखाड़ फेंकना बहुत मुश्किल दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, चीन की बढ़ती सैन्य ताकत एवं बांग्लादेश में बढ़ती भारत विरोधी गतिविधियां भारतीय सुरक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने की निरंतर चेतावनी दे रही हैं।


*महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में स्काउट्स प्रशिक्षण* : उपरोक्त चुनौतियों एवं स्थितियों के मद्देनजर भारत सरकार को चाहिए कि देश के समस्त महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में स्काउट्स प्रशिक्षण को अनिवार्य किए जाने की योजना को मूर्त रूप प्रदान करे। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं पूर्व गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी इस योजना का समर्थन कर चुके हैं। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू का उस समय यही मानना था कि युवाओं को कम से कम दो साल का सैनिक प्रशिक्षण आवश्यक रूप से दिया जाना चाहिए। यदि इसे संवैधानिक रूप से देखा जाए तो संविधान के चौथे भाग के अनुच्छेद 51-ए (डी) में उल्लेख है कि प्रत्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य है कि वह राष्ट्र सेवा व रक्षा के लिए तत्पर रहे। इस मुद्दे पर यदि चिंतन-मनन किया जाए तो यह निर्णय भारतीय सुरक्षा परिवेश को काफी मजबूत बनाएगा।

वर्तमान समय में विश्व के करीब सात दर्जन देशों में सैन्य अध्ययन एवं प्रशिक्षण अनिवार्य है, जिनमें ईरान, इराक, इजरायल, मिस्र, ताइवान, रूस, जर्मनी, सूडान, कोरिया, अंगोला एवं अल्जीरिया आदि प्रमुख हैं। सैनिक प्रतिभा के धनी, महान सैन्य विचारक व महान शासक नेपोलियन ने अनिवार्य सैनिक सेवा योजना लागू करके ही अपनी सैन्य शक्ति को कई गुना ज्यादा बढ़ाकर कई जीत हासिल की थी। इसके अलावा भी विश्व इतिहास में अनेक ऐसे महान शासक हुए हैं, जिन्होंने इस तरह की योजना को अपने देश में न केवल लागू किया, बल्कि इसी बलबूते अपने देश की प्रतिष्ठा को मजबूती से आगे बढ़ाने में कामयाब भी रहे।

*कम खर्च में आसान कार्यक्रम कार्यान्वयन* : जहां तक भारत में युवाओं को आवश्यक सैन्य प्रशिक्षण देने की बात है तो सवाल यह है कि इस प्रशिक्षण का प्रारूप कैसा होना चाहिए। देश के अनेक महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में रक्षा अध्ययन, सुरक्षा अध्ययन,स्काउट युद्ध अध्ययन, स्काउट सामाजिक अध्ययन,स्काउट सैन्य अध्ययन एवं स्काउट सैन्य विज्ञान आदि नामों से एक ही पाठ्यक्रम की पढ़ाई जारी है। इन सभी का पाठ्यक्रम स्काउट सैन्य संगठनों, शस्त्रस्त्रों के विकास, विशेषताओं व प्रयोग के अध्ययन के साथ युद्ध कला, युद्ध कौशल एवं प्रशासन से संबंधित जानकारी प्रदान करता है। इसके अलावा इनके अध्ययन में सामाजिक, आíथक, ऐतिहासिक, भौगोलिक, भौतिक, मनोवैज्ञानिक, राजनीतिक, औद्योगिक व सांस्कृतिक आदि तत्व आते हैं और यही तत्व राष्ट्रीय चेतना व जागरूकता का मूल आधार हैं। इन्हीं तत्वों व मूल आधारों से युवाओं में कर्तव्यनिष्ठा, निस्वार्थ राष्ट्र सेवा, राष्ट्र के लिए त्याग व सर्वोच्च बलिदान भावना, सामाजिक हित व प्रतिबद्धता, अनुशासन, राष्ट्रीय एकता व अखंडता जैसे मूल गुणों का विकास होता है।

अपने विभिन्न प्रकार के पाठ्यक्रमों के तहत इस अध्ययन में नवयुवक व युवतियां इतिहास के आरंभ से अब तक के क्रम में वैदिक, रामायण, महाभारत, मौर्य, राजपूत, मुगल, मराठा, सिख तथा ब्रिटिश कालीन सैन्य व्यवस्था की जानकारी के साथ-साथ स्वतंत्र भारत के रक्षा संगठन एवं शस्त्रस्त्रों की जानकारी हासिल करते हैं। इसके अतिरिक्त विश्व प्रसिद्ध अन्य सैन्य व्यवस्थाओं व युद्धों के अध्ययन से प्राप्त सैन्य शिक्षाओं व अनुभवों से भिज्ञ होते हैं। यही नहीं, युद्ध की परिभाषा, क्षेत्र, विशेषताएं, कमियां, युद्ध के सिद्धांत, कूटनीतिक योजना, समरतंत्र आदि के अलावा भारत की रक्षा नीति, परमाणु नीति, विदेश नीति, पड़ोसी देशों के साथ संबंधों की स्थिति, युद्ध कालीन वित्त व्यवस्था व रक्षा बजट, नागरिक सैनिक संबंध तथा नागरिक प्रशासन में सैनिक सहयोग आदि की जानकारी हासिल करते हैं।

इस स्काउट विषय का दूसरा हिस्सा, जिसे युवा वर्ग प्रयोगात्मक रूप में पढ़ता है, वह भी सैन्य प्रशिक्षण ही है। शांति एवं युद्ध काल के लिए एक कमांडर व उसके दल के सैनिक अपनी क्षमता व दक्षता विकसित करने के लिए कुछ खास चीजें भी सीखते हैं। इनमें वे सैनिक सांकेतिक चिन्हों की जानकारी, मानचित्र अध्ययन, दिशाओं का विस्तृत ज्ञान, कंपास व सíवस प्रोटेक्टर के उपयोग के अलावा प्लाटून संगठन बटालियन सहित व उनके हथियार, फायर के प्रयोग, फायर पर नियंत्रण आदेश, मौखिक आदेश, गश्ती दल व उसके कार्य, आक्रमण व प्रतिरक्षा की स्थिति में संग्राम कार्यविधि, संदेश भेजने व लिखने के तरीके, सामरिक संरचनाओं के साथ विभिन्न प्रकार की युद्ध व शांति कालीन जानकारी हासिल करते हैं। इससे युवक सैन्य गुणों से परिपूर्ण व समस्त सुरक्षा चुनौतियों को समझने में सक्षम हो जाता है।

यदि सरकार उपरोक्त विषयों की अध्ययन वस्तु पर गंभीरतापूर्वक विचार करे, तो अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण योजना को स्नातक स्तर पर लागू किया जा सकता है। इससे भारत विश्व के उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनमें युवाओं के लिए सैन्य प्रशिक्षण अनिवार्य है। इसे लागू करना खर्चीला कार्यक्रम नहीं होगा, क्योंकि इसे पढ़ाई के साथ-साथ पूरा किया जा सकेगा। यदि नीति नियंताओं को इसमें कोई कमी नजर आती है तो इसके पाठ्यक्रम व प्रयोगात्मक प्रक्रिया में कुछ बदलाव भी संभव है। चूंकि यह प्रस्ताव खर्चीला नहीं होगा, इसलिए इसमें सफलता के अवसर ज्यादा हैं। वैसे इसे अनिवार्य करने पर शुरू में तो अध्यापकों की कमी होगी, पर धीरे-धीरे यह कमी दूर हो जाएगी।

वैसे रक्षा की द्वितीय पंक्ति के रूप में युवाओं के लिए एनसीसी यानी नेशनल कैडेट कोर का ऐच्छिक कार्यक्रम चल रहा है, लेकिन इसमें छात्र-छात्रएं सीमित संख्या में होते हैं और यह खर्चीला होने के साथ ही सीमित पाठ्यक्रम वाला है। इसलिए अनिवार्य स्काउट प्रशिक्षण के लिए इसकी अनिवार्यता में सफलता के अवसर कम दिखाई देते हैं। ऐसे में स्काउट्स प्रशिक्षण की अनिवार्यता के लिए कम खर्चे वाले तथा आसानी से लागू हो जाने वाले विषय पर फैसला लिया जा सकता है जिससे रक्षा व अन्य चुनौतियों से निपटने वाली युवा पीढ़ी तैयार हो सके।
     स्काउट्स प्रशिक्षण बहुत ही कम बजट पर विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, स्कूल,ओपन ग्रुप,शहर,कस्बे,ग्रामीण,मौहल्लोंआदि में आसानी से कराया जा सकता है ।
  

एल टी मनोज सिन्धी
रीजनल ऑर्गनाइजिंग कमिश्नर
एवं सचिव उत्तर प्रदेश 
हिन्दुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स ।
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