फ़सलों का लाभकारी मूल्य मिले तभी सुधरेगी किसानों की हालत : हरबीर सिंह
रामपुर/उत्तर प्रदेश
रामपुर (एन 24):भारतीय किसान संघ के 43वें स्थापना दिवस के अवसर पर किसान परिवार सम्मेलन का आयोजन जनपद रामपुर के सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज़ मिलक में किया गया।
जिसकी अध्यक्षता जिला सहकारी बैंक रामपुर के अध्यक्ष देवकरन गंगवार ने की तथा संचालन महिमा शंकर पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर बोलते हुए भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री ठाकुर हरबीर सिंह ने कहा कि भारतीय किसान संघ की स्थापना 04 मार्च 1979 को कोटा राजस्थान में श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी द्वारा की गई थी।
उन्होंने कहा कि यह संगठन किसानों के लिए किसानों के द्वारा ही चलाए जाने बाला एक गैरराजनैतिक राष्ट्रबादी किसान संगठन है, जो कि राष्ट्रहित की चौखट पर किसान हित की बात करता है।
उन्होंने कहा कि हमारा नारा है कि "देश मे हम भण्डार भरेंगे, लेकिन क़ीमत पूरी लेंगे"। आज किसानों ने देश के सभी भण्डार पूरी तरह से भर दिए हैं लेकिन उनका लाभकारी मूल्य नहीं मिल पाने के कारण किसानों की स्थिति दयनीय है।
उन्होंने कहा कि भाकिसं हमेशा से ही लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य किसानों को मिले जिसके लिए संघर्षरत है। इसलिए सरकारों को चाहिए कि वह किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए लाभकारी मूल्य की गारण्टी दें तभी किसानों का भला हो सकता है।
जिला अध्यक्ष आदेश शंखधार ने कहा कि हमारे द्वारा अभी तक कुल दस हजार सदस्य बनाए गए हैं। जिसमें 65 ग्राम समिति एवं तीन विकास खण्ड गठित किए जा चुके हैं वर्ष 2022 के अन्त तक जिला के सभी छ: विकास खण्ड को गठित करते हुए संगठन को शिखर पर ले जाने का कार्य करेंगे।
संगठन निरन्तर किसानों के हितों को लेकर संघर्षरत है तथा शासन व प्रशासन की मदद से किसानों के कार्य कराने में भी सक्षम है। तथा किसानों से अपील है कि वह अपनी आने बाली गेहूँ की फ़सल को केवल और केवल सरकारी क्रय केन्द्रों पर ही तौल कराएँ
और न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ उठाएँ तथा कोई भी समस्या होने पर भाकिसं को तत्काल अवगत कराएँ। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास रहेगा कि किसानों को ज़्यादा से ज़्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ दिला सकें।
इस अवसर पर कार्यक्रम में सुनील कुमार सिंह प्रान्त संगठन मंत्री, राजसिंह चौहान प्रान्त महामंत्री, ग़जराम सिंह, रामवीर सिंह, डॉ राजीव गंगवार, राजवीर यादव, वीरेश शर्मा, मथुरा प्रसाद दिवाकर, हुलासराय, भूपसिंह लोधी, वीरपाल गंगवार,
अरविन्द गंगवार, ब्रह्माशंकर पाण्डेय, नरेश पाठक, मोहनलाल प्रजापति, प्रेमबहादुर गंगवार, डालचंद पाल, इरशाद हुसैन, मोहम्मद उवैस, चन्द्रप्रकाश गंगवार, सर्वेश गंगवार, सोमपाल राठौर, रामबहादुर भगत जी, प्रमोद गुप्ता, लालता प्रसाद राठौर,
महेश पाण्डेय, कृष्ण मुरारी शर्मा, पप्पू यादव, बाबूराम कश्यप, लालबहादुर, राजाराम, पूरनलाल, बुद्धसेन गंगवार, भूकन सरन, रीता यदुवंशी, सावित्री शर्मा, संगीता शंखधार आदि सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।