मिलावटी तेल के इस्तेमाल से मानव शरीर पर पड़ रहा है विपरीत प्रभाव।
तेल माफियाओं की हो रही है बल्ले बल्ले, स्वास्थ्य महकमा बना मौन
सहसवान, बदायूं-- यदि आप पीले रंग के किसी भी तेल को शुद्ध सरसों का तेल समझकर खरीदते आ रहे हैं तो यह खबर आपके लिए ही है। इस समय बाजार में मिलावटी सरसों का तेल धड़ल्ले से बिक रहा है।
व्यापारी बाजार में असली सरसों के तेल की तरह से ही एक दम पीले और चमकीले रंग का यह मिलावटी तेल उपलब्ध करा रहे है। तेल माफिया सरसों के तेल में मिलावट करके जहां लाखों में खेल रहे हैं,
वहीं जनता की जेब पर डाका और स्वास्थ्य से सरेआम खिलवाड़ किया रहा है। अफसरों की लापरवाही के चलते माफियाओं के हौंसले बुलंद हैं।
नकली तेल का यह खेल नगर व देहात क्षेत्रों में संचालित तेल के स्पेलर की आड़ में चल रहा है बता दें कि नगर में इस समय खाद्य तेल का काला कारोबार जोरो से हो रहा है। सरसों के तेल में मिलावट खोरी कर तेल माफिया लाखों में खेल रहे हैं।
नगर से लेकर गांव-देहात में सरसों के तेल में राइसब्रान तेल मिलाकर सरसों के दामों पर बेचा जा रहा है। शुद्ध सरसों के तेल से आधी कीमत पर ही पॉमआयल व राइस ब्रान (चावल के छिलके से तैयार तेल) मिलाकर कई गुना अधिक तक कमाई की जा रही है।
शुद्ध सरसों के पीले रंग के लिए खतरनाक केमिकल का प्रयोग कर माफिया देश मे फैली वैश्विक बीमारी कोरोना वायरस को नजरअंदाज करते हुए
जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि नगर में गुपचुप तरीके से भारी मात्रा में पॉम ऑयल व राइसब्रान तेल बाहर से मंगाया जा रहा है।
कैसे होती है मिलावट
स्पेलरो की आड़ में सरसों के तेल में दोगुने से तीन गुना तक की मात्रा में पॉमआयल व राइस ब्रान मिलाया जा रहा है। इसके बाद मार्केट में सप्लाई किया जा रहा है।
अधिक मुनाफे के चक्कर फुटकर विक्रेता इस तेल को बिक्री कर रहे हैं। अनजान उपभोक्ता इस तेल को खरीदकर बेवजह ही विभिन्न गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं
अफसरों की लापरवाही के चलते तेल माफिया जिले के नगर व देहात क्षेत्रो में नकली तेल तैयार कर सप्लाई कर रहे हैं ये नकली तेल सम्भल व चन्दौसी से मंगाया जाता है
किसकी बाजारी कीमत नकली पॉम ऑयल का तेल 50 से 55 रुपए प्रति लीटर है,
जबकि राइस ब्रान 65 से 70 रुपए प्रति लीटर है। मिलावट खोर राइसब्रान या नकली पॉम ऑयल में आधा से एक तिहाई तक सरसों का तेल मिलाते हैं।
इन तेलों में खुशबू नहीं होती है। इसलिए सरसों के तेल की ही खुशबू देने लगता है।
सरसों के पीले तेल की तरह ही दिखने के लिए इसमें एक पीला केमिकल युक्त रंग मिलाया जाता है। इसके बाद तेल को मार्केट में सप्लाई कर दिया जा रहा है।
कार्यवाही नही होने के चलते नगर व देहात क्षेत्र में मिलावटी तेल का धड़ल्ले से बस्तूर जारी है। इसको लेकर स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से लापरवाह बना हुआ है
बाजार में बिक रहे इस मिलावटी तेल पर पाबंदी लगना जरूरी है इसका इस्तेमाल से मानव शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है ।