आखिर जिम्मेदार ने चंद सिक्कों की खनक में जमीर प्राइवेट अस्पताल एवं नर्सिंग होम्स माफियाओं के यहां रखा गिरवी
जिले में प्राइवेट अस्पताल एवं नर्सिंग होम्स की भरमार
मुख्य चिकित्साधिकारी एटा ने भष्ट्राचार की सारी रस्में निभाई
एटा: जिले के गली-मोहल्लों एवं कस्बों में प्राइवेट अस्पताल एवं नर्सिंग होम्स धड़ल्ले से चल रहे हैं जिनमें बड़ी संख्या में ऐसे अस्पताल एवं नर्सिंग होम्स हैं जिनका स्वास्थ्य विभाग में रजिस्ट्रेशन भी नहीं हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कृपादृष्टि बराबर बनी रहती हैं, अपने निजी स्वार्थों और अधिक कमाई के चक्कर में स्वास्थ्य विभाग जिले की जनता को मौत के मुंह में धकेल रहा है।
आखिर जिम्मेदार आंखे क्यो मूदे
माफियाओं का सूत्रधार/ संरक्षक वने राकेश कश्यप ने उत्तर प्रदेश के जनपद एटा में नगर कोतवाली के कोतवाल को जान से मारने की नीयत से खंजर से वार कर दिया, जिसमें कोतवाल की जान तो बच गई, लेकिन सरकारी महकमों में साफ संदेश गया, जिसने कोतवाल पर हमला किया वो एफआईआर के वाद भी न्यायलय से वच निकला वो ही नटवरलाल है,यही से माफियाओं के संरक्षक वने और मुख्य चिकित्साधिकारी एटा कार्यालय में अपनी जड़े जमा दी,आज भी प्राइवेट अस्पताल एवं नर्सिंग होम्स तथा अल्ट्रासाउंड कुकुर मुत्ते की तरह जगह जगह पनप रहे है
, मारहरा में अल्ट्रासाउंड नया खुलने की फाइल मुख्य चिकित्साधिकारी ने रिजेक्ट कर दी अब फाइल माफिया के सिंघम/मिस्टर नटवरलाल श्री कश्यप को सौंपी गई है, माफिया से मुंह मांगी रकम पर मारहरा में अल्ट्रासाउंड खुल गया है, जिसमें माफिया द्वारा चांदी का मुकुट डॉ उमेश चन्द्र त्रिपाठी मुख्य चिकित्साधिकारी एटा एवं मिस्टर नटवरलाल राकेश कश्यप भेंट चढ़ाई गई है,
हाल में मिस्टर नटवरलाल के विना कोई काम मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से करा नही सकता है,
प्राईवेट नर्सिंग होम्स एवं अस्पतालों में हो रही मौतों पर थोड़ी देर का शोर फिर शांति
कल शहर के चर्चित क्लिनिक सन्मति सेवा धाम नर्सिंग होम पर डॉ रुपा जैन की लापरवाही से प्रसूता की हुई मौत हो गई, परिजनों ने काफी बवाल काटा तो पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत करा दिया।
इसके अलावा जिलेभर में बड़ी संख्या में अवैध क्लिनिक भी संचालित है जिनपर आयेदिन जच्चा-बच्चा की मौत की खबरें आती रहती हैं, लेकिन इन अवैध क्लिनिकों पर दिखावे की कार्यवाही तभी होती है जब वहां जच्चा-बच्चा की मौत हो और मामला मीडिया में उछल जाए।
मौतों पर जनप्रतिनिधियों ने भी बंद कर रखी हैं आंखें
अवैध क्लिनिकों पर हो रही मौतों पर जनता द्वारा चुने जनप्रतिनिधियों ने भी आंखें बंद कर रखी हैं यह कहना ग़लत नहीं होगा कि आयेदिन अवैध नर्सिंग होम्स पर हो रही मौतों के लिए जितना जिम्मेदार उस नर्सिंग होम का संचालक और उसका पोषक स्वास्थ्य विभाग है उतना ही जिम्मेदार जनप्रतिनिधि भी हैं क्योंकि उनका मौन समर्थन भी ऐसे लोगों को भरपूर मिल रहा है।
जिलेभर में जिन अवैध नर्सिंग होम एवं अस्पतालों पर कई बार स्वास्थ्य विभाग ने की कार्यवाही वो आज भी नाम बदलकर खुलेआम चल रहे हैं, जनपद में अवैध नर्सिंग होम के कुछ संचालकों का ऐसा दबदबा है कि कई बार कार्यवाही होने के बाद भी धड़ल्ले से संचालित रहते हैं जिन्हें कहीं न कहीं नेताओं का समर्थन भी मिला हुआ है।
जनपद के किसी भी मुख्य मार्ग पर पड़ने वाले गांव कस्बों में छोलाछाप डाॅक्टर दुकानें खोलकर बैठे हैं और लोगों के जान-माल के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं इनपर स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाकर कार्यवाही करना नहीं चाहता, ऐसे छोलाछाप दुकान खोलकर बैठे डाॅक्टर पर स्वास्थ्य विभाग की नजर जब ही पड़ती है जब वो किसी को मौत के घाट उतार दे, कुल मिलाकर स्वास्थ्य विभाग ने कार्यवाही करने के लिए अपना नियम बना लिया है कि जब घटना घटे तभी क्लिनिक सीज करने की कार्यवाही की जाए उससे पहले किसी और की दुकान और अपनी तिजोरी पर ताला न डाला जाए।
मिस्टर नटवरलाल की जड़े मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में जमी हुई
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में भर्ती समूचे जनपद के स्वास्थ्य केंद्र पर इनकी ही कृपा से होती है,जिसका जीता जागता उदाहरण मिस्टर नटवरलाल राकेश कश्यप ने खुद कंप्यूटर से स्कैन मार्क सीट तैयार कर पत्नी को स्वास्थ विभाग में भर्ती करा दिया, स्कैन मार्क सीट/अंक तालिका स्कैंडल में एक शिकायत श्री अमित किशोर जिलाधिकारी एटा से शिकायकर्ता ने की तो स्वास्थ विभाग भर्ती कमेटी फंस गई जिसमें मुख्य चिकित्साधिकारी एटा भी फंसे, स्वास्थ्य विभाग ने अपने आप को वचाने और मिस्टर नटवरलाल की पत्नी को वचाते हुए नौकरी से इस्तीफा दिलवा कर मंजूर कर लिया