एटा के जिला कारागार में डीजे और डीएम तथा एसएसपी ने एक साथ किया निरीक्षण
जेल में चीफ तथा बेरिंग राइटर और पीलियाओं के फूले हाथ पैर
जिला जेल में बंद बंदी से की वार्ता
उत्तर प्रदेश के जनपद एटा के जिला कारागार में एक साथ जनपद जिला जज अनुपम कुमार एवं जनपद जिला मजिस्ट्रेट अंकित अग्रवाल तथा उदय शंकर सिंह बरिष्ठ पुलिस
अधीक्षक ने छापा मारा तो जेल के आठ नवंबर बैरिग में हड़कंप मच गया,आठ नवंबर बैरिंग जेल विगडेल कैदी/वंदी/भण्डारिया/माली/नशेड़ी/गजेड़ी आदि के लिए सन् 2014 में वहार से रास्ता दे कर जेल के अन्य बैरिंगों से अलग कर दी गई है,
जेल वाकी बैरिंग एक साथ जुड़ी है,सबसे पहले मुलाजा बैरिंग में पुलिस के हत्थे चढ़े क्रिमिनल्स को एक हप्ताह रखा जाता है, यहां से एक से लेकर सोलह वैरिंग में भेजा जाता है, जेल अस्पताल में भी सिफ्ट होते है,आठ नवंबर बैरिंग में ही निर्वतमान जिला पंचायत अध्यक्ष महोदय को रखा गया है,
*जेल के निरीक्षण/छापा में सांठ गांठ की वू*
एटा कारागार में जब भी छापा/निरीक्षण होता है,वो खाली दिखावा होता है, जेल में बंद बंदी के परिवार बताता है, वंदी जब जेल से छूट कर आता है, जब बो हैरान कर देने वाली बातें बताता है, कहता है जेल के अन्दर खाने कैन्टीन ढ़ाई लाख से पांच लाख रुपए में उठती है,वाल काटने का ठेका डेढ़ लाख से ढाई लाख रुपए दिया जाता है,
गुटखा -वीडी-सीखरेट- साबुन -सैम्पू -तेल- नमकीन आदि की कैन्टीन एक लाख से दो लाख में उठती है,जब छापा मारा जाता है, तो जेल के ग्यारह नम्बर बैरिंग के लैट्रिन के पीछे छिपा लेते है, अथवा बैरिंग की छत पर छिपाते हैं, मुलाजा बैरिंग में एक हप्ताह के एक हजार से दस हजार रुपए प्रति क्रिमिनल राइटर के माध्यम से बसूला जाता है, ऐसे ही बैरिंग में राइटर के माध्यम से उगाही कराई जाती है,छापे में झुनझुना ही हमेशा मिलता है ,
जेल मैनुअल नियमावली के नियम
जेल मैनुअल एक्ट में एक बंदी को गुड़ एवं घी तथा दालें तथा सब्जी रविवार को पूड़ी सब्जी आदि है,