रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंस को 2 लाख 8 हज़ार 333 रुपए 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश

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रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंस को 2 लाख 8 हज़ार 333 रुपए 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश

Saturday, July 15, 2023 | July 15, 2023 Last Updated 2023-07-16T06:26:24Z
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👉 रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंस को 2 लाख 8 हज़ार 333 रुपए 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश 

👉 कंपनी ने दिल की पुरानी बीमारी बता क्लेम किया था रिजेक्ट

बठिंडा 15 जुलाई 2023 ज़िला उपभोक्ता कमिशन बठिंडा ने रत्न लाल निवासी बठिंडा को रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंस द्वारा क्लेम देने से मना करने करने पर 2 लाख 8 हज़ार 333 रुपए केस फाइल करने की तिथि से लेकर पेमेंट किए जाने तक 9 प्रतिशत ब्याज सहित 45 दिन के अंदर देने का आदेश सुनाया है।


शिकायतकर्ता रत्न लाल ने उक्त बीमा कंपनी से 5 लाख का हेल्थ केयर इंश्योरेंस कैशलेस मेडिकल हेल्थ इंश्योरेंस करवाया था। बीमा करवाने के समय इंश्योरेंस कंपनी द्वारा उसका फुल हैल्थ चैकअप भी करवाया गया था । कुछ दिन बाद उसे घुटनों में कुछ तकलीफ हुई।


 दर्द होने पर उसने अस्पताल से चैकअप करवाया जहां उसे पता चला कि उसके घुटने खराब हो गए हैं जिसका ऑपरेशन होगा। रत्न लाल ने फोर्टिस हस्पताल मोहाली से दोबारा चेकअप करवाया, जहां 14 फरवरी 2019 को उसका बायां घुटना बदला गया।


इस इलाज पर रत्न लाल का 2 लाख 8 हज़ार 333 रुपए का खर्चा आया। उसने हस्पताल से वापिस आने पर इंश्योरेंस कंपनी के पास क्लेम के लिए सभी दस्तावेज़ जमां करवा दिए। फिर 25 अप्रैल 2019 को इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से रत्न लाल को एक पत्र मिला जिसमें लिखा गया था


कि की उसे कॉर्नरी आर्टरी यानी हार्ट प्रोब्लम की पुरानी प्रोब्लम है, यह कहते हुए कंपनी ने उसका बीमा क्लेम रद्द कर दिया। उसके बाद रत्न लाल ने बठिंडा की उपभोक्ता कमिशन बठिंडा में रेलिगेयर इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ केस दायर कर दिया।


 दोनों पार्टियों की दलीलें सुनने के बाद उपभोक्ता कमिशन ने फैसला सुनाया कि पुरानी बीमारी का घुटने के ऑपरेशन के कोई संबंध नहीं है और यह संबंध साबित भी होना चाहिए। हार्ट प्रोब्लम का तो घुटने की बीमारी से वैसे भी कोई संबंध नहीं है,

केवल इसी बात पर इंश्योरेंस कंपनी द्वारा शिकायकर्ता का बीमा क्लेम रिजेक्ट कर देना सरासर गलत है। उपभोक्ता।कमिशन ने रेलिगेयर इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम देने से मना करने करने पर 2 लाख 8 हज़ार 333 रुपए केस फाइल करने की तिथि से लेकर पेमेंट किए


 जाने तक 9 प्रतिशत ब्याज सहित 45 दिन के अंदर देने का आदेश सुनाया है,
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