अपने लक्ष्य व अभियान को मथुरा से 108 दिवसीय कार्यक्रम को निकले।

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अपने लक्ष्य व अभियान को मथुरा से 108 दिवसीय कार्यक्रम को निकले।

Tuesday, December 12, 2023 | December 12, 2023 Last Updated 2023-12-12T09:07:36Z
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अपने लक्ष्य व अभियान को मथुरा से 108 दिवसीय कार्यक्रम को निकले।

सहसवान/कुलचौरा अपने लक्ष्य व अभियान के साथ 27 अगस्त को जयगुरुदेव आश्रम मथुरा से 108 दिवसीय शाकाहार-सदाचार, मद्यनिषेध, आध्यात्मिक-वैचारिक जनजागरण यात्रा लेकर निकले संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के उत्तराधिकारी पूज्य पंकज जी महाराज 11 जिलों में अपना मानवतावादी

, आत्मकल्याणकारी सन्देश सुनाने के बाद कल सायंकाल अपने 107वें तथा अभियान के अन्तिम पड़ाव पर जयगुरुदेव आश्रम कुलचौरा-मानपुर के निकट मैदान पर पधारे। घण्टों पूर्व से दर्शन व स्वागत की लालशा संजोये हजारों भाई-बहनों व बच्चे-बच्चियों ने एक रंगरूप की विशेष परिधान के साथ दीप प्रज्वलित कलशों, फूल-मालाओं, पुष्प वर्षा, रंगोली,

 आतिशाबाजी व बैण्ड-बाजे के साथ खूब धूमधाम से काफिले का स्वागत किया। आज यहाँ दिन के 12 बजे से समापन सत्संग समारोह का आयोजन हुआ।
अपने सत्संग सम्बोधन में पूज्य पंकज जी महाराज ने कहा कि यह मानव जीवन अनमोल है।

 जब जन्म-जन्मान्तरों के पुण्य कर्म उदय होते हैं तब यह मनुष्य शरीर हमको मिलता है। महात्मा कहते हैं कि ‘‘मिली नर देह यह तुमको, बनाओ काज कुछ अपना। पचो मत आय यहि जग में जानियो रैन का सुपना।’’


 मानव चौरासी लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ योनि यही है। कारण कि इसी मनुष्य शरीर में दोनों आंखों के मध्य में वह ‘‘जीव अविनाशी’’ बैठा हुआ। जिसके नाते हमारी आपकी जिन्दगी चलती रहती है। उसी जीवात्मा में प्रभु के दर्शन-दीदार करने की एक आंख है जिसको शिवनेत्र, तीसरा नेत्र या थर्ड आई भी कहते हैं। महात्मा पहचान बताते हैं कि ‘‘आंखी मध्ये पांखी चमके, पांखी मध्ये द्वारा। ता मध्ये दूरबीन लगावे दीखै सिरजनहारा।’’ उस परम पिता परमात्मा की वेदवाणी,


 अनहदवाणी या कलमा सुनने के लिये उसी जीवात्मा में एक कान भी है जिसे तीसरा कान कहते हैं। इसी के नाते हमको दुनियां की भी आवाज सुनाई देती है। जब जीवात्मा इस शरीर से निकल जाती है तो कान के होते हुये भी हमें कुछ सुनाई नहीं पड़ता है। यही इसका प्रमाण है। लेकिन इसका भेद कोई मर्मी गुरु, पूरा गुरु ही बता सकता है

जिसने सुरत-शब्द के अभ्यास द्वारा अपनी जीवात्मा को जगा लिया हो जब इस दर्जे के सन्त महात्मा मिल जाते हैं तो वे बताते हैं कि देवी और देवता हैं, परन्तु वे इन शरीर की आंखों से नहीं देखे जा सकते उनको देखने के लिये और उनकी वाणियाँ सुनने के लिये कलयुग की सरल साधना (सुरत-शब्द योग) करनी होगी। मानस भी कहती है


‘‘सुगम पंथ मोंहि पावहिं प्रानी। भक्ति की मारग कहउँ बखानी।’’ हमारे गुरु महाराज परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने अपनी 116 वर्ष की आयु तक इसी नाम योग साधना का भेद बताकर देश में करोड़ों लोगों को शाकाहारी-सदाचारी बनाकर ऊपरी मण्डलों की सैर करा दिया। यही कारण है कि देश का बच्चा-बच्चा आज इस जयगुरुदेव नाम से भिज्ञ है। कहा भी है

 कि ‘‘सोइ जानइ जेहिं देहु जनाई। जानत तुम्हहिं, तुम्हहिं होइ जाई।’’ गुरु की असली पहचान तो अन्तरी साधना में ही मिलती है। आप लोग भी सुमिरन, ध्यान, भजन के द्वारा प्रभु की वाणी को अपने घट में सुन सकते हो। 
महाराज जी ने नामदान देकर सुमिरन, ध्यान, भजन का तरीका भी विस्तार से समझाया। पंकज महाराज ने शाकाहार अपनाने पर जोर देते हुये कहा कि आज खान-पान अशुद्ध होने के कारण ही देश का नवजवान दिशाहीन होता चला जा रहा है और तरह-तरह के नशीले पदार्थों की गिरफ्त में आता जा रहा है। यही नहीं उसकी असामयिक मृत्यु तक हो जाती है

 जो हम सबके लिये एक चिन्ता का विषय है। इस पर सबको विचार करना चाहिये। आज के समय में शिक्षा बहुत जरूरी है परन्तु शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी जरूरी है। बड़ों का सम्मान करना, छोटों को प्यार, स्नेह करना हमारे मानव धर्म की पहली सीढ़ी है। जिसे आज का नवजवान भूलता जा रहा है। बुरी संगत शोहबत से बच्चों को बचायें, यह आप सबसे हमारी अपील है।

 इसी एक सूत्र से समाज अच्छा बन जायेगा। सत्संग में भागीदारी के लिये जिला बदायूँ की जनता तथा प्रशासन का आभार जताया।
आगामी 20 से 24 दिसम्बर तक आगरा-दिल्ली बाई पास स्थित जयगुरुदेव मंदिर मथुरा में पूज्यपाद स्वामी घूरेलाल जी महाराज ‘दादा गुरूजी’ का 75वां वार्षिक भण्डारा सत्संग मेला आयोजित होगा। आप से अपील है कि समय निकालकर पावन पर्व पर जयगुरुदेव आश्रम मथुरा पधारें। दया, दुआ, आशीर्वाद प्राप्त करे। शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने में पुलिस प्रशासन का सहयोग रहा।


इस अवसर पर जयगुरुदेव संगत बदायूं के जिलाध्यक्ष उपदेश सिंह, भूस्वामी उदयपाल, प्रधान सतीश यादव, पूर्व प्रधान राकेश जी, धीर सिंह, वीरपाल, नरेन्द्र, रामू, अनार सिंह, सहयोगी संगत चन्दौली के अध्यक्ष जसवन्त प्रसाद चौरसिया, आनन्द, देवराज यादव, संस्था के महामन्त्री बाबूराम यादव, प्रबन्धक सन्तराम चौधरी,

 दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विजय पाल सिंह, बिहार अध्यक्ष मृत्युन्जय झा, रा. उपदेशक राजेश जी, नानक भाई टी मिस्त्री, अनूप कुमार सिंह, उपदेशक डा. कुंवर बृजेश सिंह आदि उपस्थित रहे। सत्संग के बाद जनजागरण यात्रा जयगुरुदेव आश्रम, मथुरा के लिये प्रस्थान कर गई।
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