सहसवान/कौल्हाई (बदायूँ) 11 दिस.। गुरु की महिमा का बखान करते हुये,उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा जगाते हुये,
कलयुग की सरल साधना (नाम योग मार्ग) का भेद देते हुये 27 अगस्त से मैनपुरी, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, सीतापुर, हरदोई, शाहजहांपुर, लखीमपुर,
बरेली आदि जिलों में 108 दिवसीय शाकाहार-सदाचार, मद्यनिषेध, आध्यात्मिक-वैचारिक जनजागरण यात्रा के साथ 12 नवम्बर से जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं परम पूज्य बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के उत्तराधिकारी पूज्य पंकज जी महाराज बदायूं जनपद में भी अपना सत्संग संदेश देते चल रह हैं।
कल सायंकाल अपने 106वें पड़ाव हेतु सहसवान ब्लाक के ग्राम कौल्हाई पधारे। बड़ी संख्या में स्थानीय भाई-बहनों व बच्चों ने पूज्य महाराज जी का गाजे-बाजे के साथ उल्लासपूर्ण स्वागत किया। सत्संग सुनाते हुये संस्थाध्यक्ष पूज्य पंकज जी ने कहा कि यह सत्संग है।
जन्म जन्मान्तरों के पुण्य कर्मों के फलस्वरूप और परमात्मा की दया से ही हमको सबको यह मानव तन मिला है और उससे भी अधिक दया यह है कि इस मानव शरीर में बैठकर सत्संग सुनने का अवसर भी मिल रहा है। ‘‘सत्संग जल जो कोई पावै, मैलाई सब कटि-कटि जावै।’’
सत्संग वह जल है जिसमें मन, चित्त, बुद्धि तथा अहंकार की मैल धुल जाती है और मानव बुरे कर्मों को छोड़कर सत्मार्ग अपना लेता है। बाल्मीकि व अंगुलिमाल का उदाहरण सर्व विदित है। महात्मा हमको समझाते हैं कि प्रभु को पाने के लिये आपको साधू नहीं बनना,
घर-बार नहीं छोड़ना। ‘‘मोको कहां ढूढ़े बन्दे मैं तो तेरे पास में।’’ खेती दुकान दफ्तर का काम ईमानदारी व मेहनत से करते हुये 24 घण्टे में से घण्टा दो घण्टा समय निकाल कर भगवान का सच्चा भजन इस मनुष्य मन्दिर में कर लो,
जिससे आत्मा चौरासी व नर्कों की सजा से बच जाये। महात्माओं ने जब अन्तरी साधना किया और ऊपरी मण्डलों में गये तो ऊपर के लोकों (नर्कों) में जीवों को मिलने वाली सजा को भी देखा और वर्णन करते हुये कहा कि ‘‘लौह के खम्भ तपत के माहीं, जहाँ जीव को ले चिपटाहीं।’’
सन्त महात्मा जब नर्कों का ये हाल देखते हैं तो उन्हें दया आती है कि इन जीवों को खोटे-बुरे कर्मों से बचा लिया जाय तो इस यातना से ये बच जायेंगे। इसीलिये गोस्वामी जी ने भी रामायण में लिखा है कि ‘‘सन्त मही विचरत केहिं हेतू? ’’
जड़ जीवन्ह कहँ करत सचेतू। हमारे गुरु महाराज परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने अपने 116 वर्ष की आयु तक देश के प्रत्येक प्रान्त, नगर-नगर, गांव-गांव तक घूम घूम कर अपराध में लिप्त करोड़ो लोगों के हाथों से तीर तलवार, तमंचे व बन्दूकें फेंकवा कर उनके हाथों में भगवान की माला पकड़ा दी और उनका जीवन सुधार दिया। मैं भी उन्हीं के पद चिन्हों पर चलने की दिशा में लगा हूं
और अपना सारा जीवन जीव जागरण में ही लगा दूंगा। पूज्य महाराज जी ने सत्संग के मध्य में नामदान भी दिया और सुमिरन, ध्यान, भजन की क्रिया को भी विस्तार से समझाया।
पूज्य महाराज जी ने युवाओं में अपराध व नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिन्ता व्यक्त करते हुये कहा कि ये युवा देश की व अपने माता-पिता की पूँजी है। पूँजी को आप लोग संभालकर रखिये तो ये अपना तो नाम रोशन करेंगे
ही अपने माता-पिता का भी नाम रोशन करेंगे। हमारी आप सब धार्मिकजनों से, समाज सेवियों से तथा देश के शुभ चिन्तकों से अपील है कि आप सब मिलकर युवाओं को शाकाहारी-सदाचारी बनायें तथा नशों की गिरफ्त में जाने से बचायें। इनकी आंखों में मां, बहन बेटी की पहचान कायम हो और एक अच्छे समाज का निर्माण हो सके।
शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने में पुलिस प्रशासन का सहयोग रहा। उन्होंने आगामी 20 से 24 दिसम्बर तक जयगुरुदेव आश्रम मथुरा में आयोजित होने वाले 75वें पावन वार्षिक भण्डारा सत्संग मेला में आने का निमन्त्रण दिया।
इस अवसर पर जयगुरुदेव संगत बदायूं के जिलाध्यक्ष उपदेश सिंह, पप्पू शर्मा ब्लाक अध्यक्ष, सोमपाल सिंह, हरिकेश, सुरेश, मुन्नालाल, ओंकार सिंह, भूस्वामी अनुज, माहेश्वरी, प्रधान पप्पू मौर्य, महिपाल, लाखन, माहेश्वरी,
सीतापुर के सहयोगी अहिबरन सिंह, सुरेन्द्रपाल सिंह, देवकीनन्दन यादव, शिवराज सिंह यादव, श्रीकृष्ण, नरपत सिंह, गोविन्द सिंह, परशुराम मौर्य, जितेन्द्र यादव आदि उपस्थित रहे।