व्यर्थ नहीं गया लाखो कार सेवकों का बलिदान : शेखर त्यागी तलहैटा
रामलला के अयोध्या में विराजने का शुभ मुहूर्त 22 जनवरी, 2024 क निकला है। प्रभु श्री राम को उनके जन्म स्थान में उनकी सही जगह पर देखने के लिए अनगिनत लोगों ने संघर्ष किया। करीब पांच सौ साल पुराने राम मंदिर निर्माण का सपना जो मेरे पूर्वजों ने देखा था,
वो पूरा होने जा रहा है. लाखों कारसेवक इस आंदोलन में शहीद हो गए, और हमारे पूर्वजों ने इस मंदिर को टूटे देखा लेकिन मेरा सौभाग्य है कि इस राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने जा रहे है।
रामलला अयोध्या में विराज सकें, इसके लिए जहाँ साधु संतों ने कई कठिन संकल्प लिए तो आम लोगों ने भी कारसेवक बन प्रभु का मंदिर बनवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके लिए साल 1990 में लाल कृष्ण अडवाणी की अगुवाई में गुजरात के सोमनाथ से रामरथ यात्रा हो शुरू हुई थी जो महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश से होते हुए अयोध्या पहुँची थी।
किसान पुत्र एवं वरिष्ठ समाजसेवी शेखर त्यागी ने बताया कि पहली कारसेवा 30 अक्टूबर 1990 और दूसरी कार सेवा 20 नवंबर 1990 को हुई थी. दूसरी कारसेवा के समय 5000 कार सेवकों का जत्था मंदिर की ओर बढ़ रहा था. हनुमान गढ़ी के पास पुलिस ने गोली चला दी. उस घटना में हजारों लोग शहीद हो गए थे।
त्यागी कहते हैं कि कारसेवकों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया. संघर्ष सफल हुआ। आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन रहा है और सभी हिन्दू घरों में दीवाली मनाने की तैयारी कर रहे है।