फर्जी बकालत नामा प्रकरण में एडब्ल्यूएफ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

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फर्जी बकालत नामा प्रकरण में एडब्ल्यूएफ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

Monday, February 12, 2024 | February 12, 2024 Last Updated 2024-02-13T02:06:53Z
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फर्जी बकालत नामा प्रकरण में एडब्ल्यूएफ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

जांचसमितिकीExclusiveरिपोर्ट आने से वकीलों में मंची खलबली

एटा। फर्जी वकालतनामा मामले में जांच समिति की Exclusive रिपोर्ट आने के बाद कचहरी में खलबली मची है। कई पूर्व और वर्तमान पदाधिकारी अधिवक्ता जांच की आंच के दायरे में आ रहे हैं। उधर, जांच समिति रिपोर्ट आने के बाद एडब्ल्यूएफ (अधिवक्ता कल्याण कोष) के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने अपना इस्तीफा दे दिया है।

पहली फरवरी को स्टांप वेंडर के यहां से फर्जी वकालतनामा पकड़ा गया। अधिवक्ताओं ने बार-अध्यक्ष और सचिव को जानकारी दी। स्टांप वेंडर के यहां छापा मारा गया तो इस तरह के और भी वकालतनामे जब्त हुए। इसके बाद मामले में समिति गठित कर जांच शुरू करा दी गई।


 समिति ने बृहस्पतिवार को जांच पूरी कर ली।इसकी रिपोर्ट शुक्रवार को कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन की खुली बैठक में प्रस्तुत की गई। बताया गया कि 2014 से फर्जी वकालतनामे पाए गए हैं। कुल 2332 वकालतनामे फर्जी पकड़े गए हैं। इनकी कीमत के हिसाब से अधिवक्ता कल्याण कोष और बार को करीब 69 लाख रुपये का घाटा हुआ है।

वकालतनामों का पूरा कार्य अधिवक्ता कल्याण कोष देखता है। ऐसे में अपनी लापरवाही मानते हुए इसके अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने अपने-अपने इस्तीफे कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन को सौंप दिए। हालांकि अभी इन्हें स्वीकार नहीं किया गया है।


 वर्ष 2014 से चल रहे इस घोटाले में कई पूर्व पदाधिकारी अधिवक्ता भी फंस सकते हैं। ऐसे में गुटबाजी भी हावी हो गई है।
सभी गुट अपने-अपने हिसाब से जांच समिति की रिपोर्ट की व्याख्या कर रहे हैं। यह है वकालतनामे की प्रक्रिया कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन ने इस कार्य के लिए अपने ही अधीन एक इकाई अधिवक्ता कल्याण कोष बनाया है। वह वकालतनामों को प्रकाशित कराती है।


इन्हें बिक्री के लिए स्टांप वेंडरों को बेच दिया जाता है। इससे प्राप्त होने वाली धनराशि को अधिवक्ताओं के कल्याण में खर्च या निवेश किया जाता है।अन्य दस्तावेजों पर भी सवालिया निशान अभी तक केवल फर्जी वकालतनामा पकड़ा गया तो इसी की जांच कराई गई।


जबकि इसी तरह के कुछ अन्य दस्तावेज भी एडब्ल्यूएफ से जारी किए जाते हैं। इसमें पर्चा पता, बेल बांड, नकल सवाल आदि के फॉर्म शामिल हैं। प्रश्न यह है कि इन दस्तावेजों की भी तो नकल बनाकर कहीं कचहरी में नहीं चलाई गई?

जाली वकालतनामों के प्रचलन की बात साबित हो चुकी है। पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच पुलिस द्वारा ही हो सकेगी। सोमवार को मामले में स्टांप वेंडर सहित अज्ञात लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।



एडब्ल्यूएफ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष ने इस्तीफे दिए हैं, इन्हें स्वीकृत नहीं किया गया है। - गिरीश चंद्र शर्मा, महासचिव, कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें।
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