गंगा समग्र ब्रज प्रान्त की बैठक में सहभागिता करने का अवसर प्राप्त हुआ

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गंगा समग्र ब्रज प्रान्त की बैठक में सहभागिता करने का अवसर प्राप्त हुआ

Wednesday, May 15, 2024 | May 15, 2024 Last Updated 2024-05-15T08:22:00Z
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गंगा समग्र ब्रज प्रान्त की बैठक में सहभागिता करने का अवसर प्राप्त हुआ ।

 यहाँ पर एक अलग ही अनुभूति मिली जिसकी शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता। इसके लिए बहन सीमा चौहान प्रांत सहसंयोजक गंगा समग्र बदायूँ का हार्दिक आभार


भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के संवाहक गंगा नदी भारतीय संस्कृति का गौरव है, जो विश्व में हमें एक अलग पहचान दिलाती है। गंगा कोई नाम नही है बल्कि प्रत्येक भारतीय के जीवन की वह सच्चाई है जिस पर हर भारतीय को गर्व की अनुभूति होती है।


 पतित पावनी, मोक्षदायिनी, जीवनदायिनी, कलिमलहारिणी आदि विभिन्न विभूषणों से विभूषित एवं महिमामंडित इस नदी का स्थान पुण्यतोया नदियों में सर्वोपरि है।


 इसीलिए भारत में इस नदी को जीवनधारा मां गंगा के नाम से पुकारा जाता है। गंगाजल को पवित्र समझा जाता है तथा समस्त संस्कारों में उसका होना आवश्यक है। पंचामृत में भी गंगाजल को एक अमृत माना गया है। अनेक पर्वों और उत्सवों का गंगा से सीधा संबंध है।

 उदाहरण के लिए मकर संक्राति, कुंभ और गंगा दशहरा के समय गंगा में नहाना या केवल दर्शन ही कर लेना बहुत महत्त्वपूर्ण समझा जाता है। इसके तटों पर अनेक प्रसिद्ध मेलों का आयोजन किया जाता है


 और अनेक प्रसिद्ध मंदिर गंगा के तट पर ही बने हुए हैं। अपनी चमत्कारी विशिष्टताओ के कारण गंगा नदी भारतीय संस्कृति का आधार रही हैं।


परंतु यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भौतिकता की चकाचौंध ने मनुष्य को इतना अविवेकपूर्ण बना दिया है कि आज वही अपने विनाश का कारण बनता जा रहा है।


प्राकृतिक संसाधनों के अनियमित दोहन औधोगिकरण एवं नगरीकरण के कारण चमत्कारी गुणों से युक्त गंगा नदी का जल प्रदूषित होता जा रहा है यही कारण है कि आज गंगा नदी विश्व की पांचवी प्रदूषित नदी बन गई हैं।


प्रदूषण के मुख्य कारण कोई और नहीं हम और आप ही है। उद्योगों एवं कारखानों का कचरा, रसायन तथा दूषित जल,नदी के किनारे त्यागा गया, मल -मूत्र, गंगा में मृत शवों को डालना,मरे हुए पशु जो सीधे गंगा में बहा दिए जाते हैं,


नदी के किनारे अथवा नदी में कूड़ा-करकट डालना, नदी तट पर शवदाह करना-इत्यादि। इस प्रदूषण से गंगा को बचाने के लिए बहुत सारे संगठन आगे आए हैं गंगा समग्र भी इन्ही में से एक है। जो पतितपावनी माँ गंगा के अविरल एवं स्वच्छ बनाने में अपनी महती भूमिका निभा रहा है।

अतः हम सभी का भी कर्तव्य बनता है कि हम भी इस पुनीत कार्य में अपना योगदान दे और लोगों में जागरूगता फैलाए। तभी हम आने वाली पीढ़ी को एक सुनहरा कल दे पाएंगे और गंगा के पुरातन एवं पौराणिक महत्व को कायम रख पाएंगे।
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