मेडीकल कॉलेज में दलालों का जखीरा
पत्र की गोपनीयता भंग किस के संरक्षण में
एटा मेडिकल कॉलेज में अस्पताल किसी दूसरे स्थान पर स्थान मिल जाने पर सिफ्ट होगा लेकिन नटवरलाल अधिकारियों में फूट डालो नीति पर काम कर रहे है,
आपको बताते चले कोई रिपोर्ट गलत तरीके से प्रस्तुत हुई तो इसका मतलब जांच गोपनीयता से होनी चाहिए,जब पत्र वायरल कर गोपनीयता भंग हो तो साहब कुछ तो गोल माल है,
जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह ने मेडिकल कॉलेज को सुधारने का काम किया है, पर्चा बनवाने के लिए लम्बी कतार सात बजे से लगने लगती है,
पर्चा काउंटर पर नो बजे तक कोई स्टाफ नही पहुंचा अचानक महामृत्युंजय दर्शन की टीम पहुंची और जायजा लेकर प्रोपर थ्रो चैनल चले,
हमने प्राचार्य मेडिकल कॉलेज को फोन किया तब दो बार के बाद तीसरे बार में फोन उठा वो भी काम बाई ने उठा मेडम के पूजा करने की बात कहकर काट दिया तब जाकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एटा को किया
तो मेडीकल कॉलेज अपनी फैकल्टी से अलग होना बताया तब जाकर तेजतर्रार आईएएस प्रेम रंजन सिंह जिलाधिकारी को अवगत कराया तब जाकर स्वास्थ्य विभाग का मीडीकल कालेज के पैरों की जमीन खिसकी तो स्टाफ को मीमो जारी हुए ,
दो मिनट में पर्चा काउंटर सुरू हुआ, अब बात आती है, इमान की तो जिम्मेदार मौन कार्यवाही करें कौन, जिलाधिकारी एटा ने सभी विभागों को टाईट किया है,
*तेजतर्रार आईएएस ने जिला एटा को प्रदेश में असलहा समर्पण करने की पहल से पहचान मिली*
तेजतर्रार आईएएस प्रेम रंजन सिंह जिलाधिकारी एटा की जिम्मेदारी से जनपद को असलहा समर्पण से प्रदेश में टाप टेन सूची में प्रथम स्थान पर ले जाकर संत सरकार की चौ तरफा प्रशंसा होने लगी है,
उत्तर प्रदेश सरकार का जनता में बहुत अच्छा संदेश जा रहा है, जहां एक तरफ असलहों के प्रदेश में पांच करोड़ से ज्यादा असलहा फार्म भरे पड़े है, जहां एटा में असलहा एक दर्जन से अधिक समपर्ण कराके सरकार की अलख जगाने वाले प्रथम भारतीय आईएएस अधिकारी है,
बेरहम दुनिया को बदल सकते है अगर एटा जिले के विभाग हैड साथ दे तो एटा की सूरत बदल सकते तेजतर्रार आईएएस
बेरहम दुनिया को बदल सकते है,पाप का विश्वास पुण्य में बदल सकते है, अगर एटा जिले के विभाग हैड एवं कर्मचारियों साथ दे तो धरती क्या आसमां बदल सकते है,