नब्ज देखी,न ही लगाया आला, बस दवा का पर्चा लिख डाला- एक मरीज के लिए बस दो मिनट

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नब्ज देखी,न ही लगाया आला, बस दवा का पर्चा लिख डाला- एक मरीज के लिए बस दो मिनट

Monday, July 15, 2024 | July 15, 2024 Last Updated 2024-07-15T07:42:16Z
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नब्ज देखी,न ही लगाया आला, बस दवा का पर्चा लिख डाला- एक मरीज के लिए बस दो मिनट
 July 15, 2024

उझानी बदायूं 15 जुलाई।
रविवार को छोड़कर रोजाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों के सो से पांच सो पर्चे बनते हैं,मरीजों की लंबी कतार लगी होने के कारण एक डॉक्टर एक मरीज को बामुश्किल से दो मिनट ही दे पाता है।

 उझानी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ( सरकारी अस्पताल) की ओपीडी में डॉक्टर इलाज के नाम पर मरीज को बामुश्किल दो मिनट का ही वक्त देते हैं। बस मरीज से बीमारी पूछी और दवाएं लिख कर पर्चा थमा देते हैं। म


रीज की न तो नब्ज देखते और न ही स्टेथोस्कोप (आला) लगाकर जांच करते हैं। ऐसे में मरीज जब कक्ष से बाहर आता है तो उसकी जुबां पर यही बात होती है कि डॉक्टर ने पूरी बात सुनी ही नहीं, बस मर्ज पूछा और दवा लिख कर दे दी। रोजाना यहां पर मरीजों के 100 से ज्यादा पर्चे बनते है

ऐसे में उझानी सहित आसपास के देहात क्षेत्रों से आने वाले हजारों मरीजों का सही तरीके से इलाज करना मुश्किल होता है। क्योंकि दो चिकित्सक इतने मरीजों को देख नहीं पाते,बस मर्ज पूछकर दवाऐं लिखने में ही समय निकल जाता है।
 वजह – ज्यादातर डाॅक्टर रोज आते ही नहीं।

 उझानी सीएचसी पर इस वक्त चिकित्सा अधीक्षक राजकुमार गंगवार,डाॅ धर्मेन्द्र कुमार,डाॅ हरीश कुमार,डाॅ अनिल कुमार गुप्ता, डाॅ आकांक्षा ,डाॅ अवनी सिंह,डाॅ हिना सफदर, सहित तीन चार संविदा चिकित्सक तैनात हैं,

तीन फार्मेसिस्ट सहित लगभग 50 स्टाफ तैनात हैं। मगर ज्यादातर छुट्टी पर रहते है। सिर्फ दो डाॅ आपको ओपीडी में नजर आएंगे, बाकी आप समझदार है सेटिंग के चलते आते ही नहीं।******** फार्मेसिस्ट के हवाले रहती है इमरजेंसी,कभी नहीं बेठते चिकित्सक

।नियम के मुताबिक डाॅ को 24 घंटे इमरजेंसी में बैठना चाहिए मगर फार्मेसिस्ट व स्वीपर चलाते हैं, चिकित्सक कमरे में आराम फरमाते हैं। मोबाइल पर कर्मचारी फोन करते हैं तब चिकित्सक उपलब्ध होता है। तब तक फार्मेसिस्ट मरीज की मरहम पट्टी कर चुका होता है, चिकित्सक को मरीज का सिर्फ रैफर लेटर बनाना है।

डॉक्टर को दिखाने आए थे, लेकिन केवल एक-दो मिनट देखा और दवाएं लिख दीं। मैं कुछ बताती, इससे पहले बोला फिर आना।- कमलेश, कछला , मरीज।


डॉक्टर को पूरी बात नहीं बता पाते हैं। पूछकर दवाएं लिख देते हैं। पूरी बात मेरी सुनें तो मुझे तसल्ली हो जाए।-राम सिंह, अब्दुल्ला गंज मरीज।
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