पीढ़ियों को संस्कार, शिक्षा और संस्कृति से जोड़ना ही सच्चा राष्ट्रनिर्माण: सम्भव जैन*

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पीढ़ियों को संस्कार, शिक्षा और संस्कृति से जोड़ना ही सच्चा राष्ट्रनिर्माण: सम्भव जैन*

Tuesday, September 30, 2025 | September 30, 2025 Last Updated 2025-09-30T15:26:20Z
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पीढ़ियों को संस्कार, शिक्षा और संस्कृति से जोड़ना ही सच्चा राष्ट्रनिर्माण: सम्भव जैन*
*संघ शताब्दी के विजयदशमी उत्सव में शस्त्र पूजन कर निकला पथ संचलन*

बहजोई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,रजपुरा खंड के अंतर्गत भिरावटी मंडल में मंगलवार को संघ शताब्दी वर्ष एवं विजयदशमी उत्सव का आयोजन बड़े ही उत्साह और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण और शस्त्र पूजन से हुई। इसके बाद अमृत 

वचन और एकल गीत प्रस्तुत किए गए, जिन्होंने उपस्थित स्वयंसेवकों व ग्रामवासियों के हृदयों को राष्ट्रभक्ति और संगठन की भावना से ओतप्रोत कर दिया।
अमृत वचन का वाचन वीरेश कुमार ने किया जबकि एकल गीत की प्रस्तुति योगेश कुमार ने दी।

 कार्यक्रम की अध्यक्षता यशपाल शास्त्री ने की। कार्यक्रम मुख्य वक्ता आरएसएस के सह जिला कार्यवाह सम्भव जैन ने अपने प्रभावशाली संबोधन में कहा कि भारत की आत्मा उसकी सनातन संस्कृति है और इसी के कारण भारत सदा से हिन्दू राष्ट्र रहा है और रहेगा। यह केवल आस्था की बात नहीं, बल्कि हमारे इतिहास और परंपराओं की साक्षात गवाही है। 

विजयदशमी का पर्व हमें बताता है कि चाहे असत्य और अन्याय कितना भी प्रबल दिखाई दे, अंततः सत्य, धर्म और न्याय की ही विजय होती है। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य शाखाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को जाग्रत और संगठित करने का अभियान है। प्रत्येक स्वयंसेवक को अपने आचरण, 

व्यवहार, संस्कार और संस्कृति से समाज में आदर्श प्रस्तुत करना होगा। आज हमें केवल विचारों तक सीमित नहीं रहना, बल्कि अपने जीवन से उदाहरण प्रस्तुत करना है। जब हमारा आचरण अनुशासन, सेवा, स्वदेशी और समरसता पर आधारित होगा, 

तभी भारत माता को पुनः परम वैभव पर प्रतिष्ठित करना संभव होगा। विजयदशमी हमें आत्मबल और संगठनबल से चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देती है। संघ का शताब्दी वर्ष संगठन की गहरी और अडिग जड़ों का प्रतीक है। आने वाली पीढ़ियों को संस्कार, शिक्षा और संस्कृति से जोड़ना ही सच्चा राष्ट्रनिर्माण है। स्वदेशी को अपनाना, 

पर्यावरण की रक्षा करना और समाज में समरसता स्थापित करना ही आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है यदि हम सब मिलकर सेवा, संगठन और संस्कार के मार्ग पर चलें तो भारत पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित होगा।
ईस अवसर पर जिला शारीरिक शिक्षण प्रमुख हरगोविंद, विपिन कृष्णवंशी, सुनील यादव, दीपक राजपूत, टेकचंद, लोकेश सहित अनेक कार्यकर्त्ता एवं ग्रामवासी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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