रामपुर में सीओ को निलंबन एवं उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की मांग पर अड़ा, जाटव महासभा

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रामपुर में सीओ को निलंबन एवं उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की मांग पर अड़ा, जाटव महासभा

Friday, February 27, 2026 | February 27, 2026 Last Updated 2026-02-27T16:41:10Z
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रामपुर में सीओ को निलंबन एवं उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की मांग पर अड़ा, जाटव महासभा 

जब तक सीओ के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, धरना जारी रहेगा। महेश साग 
रामपुर। मिलक क्षेत्राधिकारी (सीओ) राजवीर सिंह परिहार के खिलाफ अखिल भारतीय जाटव महासभा ने मोर्चा खोल दिया है। महासभा के प्रदेश अध्यक्ष महेश सागर रामपुर कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। उनकी मांग है कि सीओ को निलंबित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए।
यह पूरा मामला 29 दिसंबर का है, जब एक स्कूल कार्यक्रम के दौरान सीओ राजवीर सिंह परिहार ने मंच से एक विशेष जाति को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह प्रकरण गरमा गया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी द्वारा ऐसी टिप्पणी सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ती है और इससे एक विशेष समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। महेश सागर ने प्रशासन पर बेरुखी का आरोप लगाते हुए बुधवार रात पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने कड़ाके की ठंड में रात गुजारी। 
सागर का कहना है कि पहले ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन सुनवाई न होने पर उन्हें अनिश्चितकालीन धरना शुरू करना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक सीओ के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका धरना जारी रहेगा।

यह प्रकरण अब राजनीतिक रूप भी लेता दिख रहा है। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार से सीओ को निलंबित करने और मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। प्रदर्शनकारी जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठा रहे हैं, उनका आरोप है कि मामले में लीपापोती की जा रही है और जांच के तथ्यों को सार्वजनिक नहीं किया गया है। महेश सागर ने एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र पर भी दलित समाज को अपमानित करने का आरोप लगाया है, उनका कहना है कि संबंधित समाचार पत्र ने सीओ का बयान प्रमुखता से प्रकाशित कर समाज को आहत किया है।

फिलहाल, जाटव समाज के विभिन्न संगठन एकजुट होकर इस आंदोलन को व्यापक रूप देने की तैयारी में हैं। प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही उच्चस्तरीय निर्णय की संभावना जताई जा रही है।
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