प्रशासनिक उपेक्षा: सहसवान की 'लाइफलाइन' बनी मुसीबत की राह, पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से सड़क बनी 'वॉटर पार्क'

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प्रशासनिक उपेक्षा: सहसवान की 'लाइफलाइन' बनी मुसीबत की राह, पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से सड़क बनी 'वॉटर पार्क'

Friday, March 13, 2026 | March 13, 2026 Last Updated 2026-03-13T09:41:36Z
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प्रशासनिक उपेक्षा: सहसवान की 'लाइफलाइन' बनी मुसीबत की राह, पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से सड़क बनी 'वॉटर पार्क'

​खस्ताहाल: चार नंबर के पास दलदल में फंसा ट्रैक्टर, बाल-बाल बची चालक की जान;_

(बदायूं) ​सहसवान! विकास के दावों की पोल खोलती सहसवान की सड़कें इन दिनों राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई हैं। लोक निर्माण विभाग की घोर लापरवाही के चलते क्षेत्र की मुख्य सड़कें अब तालाब और दलदल में तब्दील हो चुकी हैं।

 गुरुवार को 'चार नंबर' इलाके में एक बड़ा हादसा होते-होते बचा, जब एक भारी-भरकम ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क के बीच गहरे कीचड़ में धंसकर पलटने की कगार पर पहुँच गई। घंटों की मशक्कत के बाद ट्रैक्टर को निकाला जा सका।


​हादसे को दावत देता 'चार नंबर' क्षेत्र
​नगर के चार नंबर इलाके से चमनपुरा, सुजावली और धोबाई और दहगवां को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग वर्तमान में नरकीय स्थिति में है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव और कीचड़ के कारण यह सड़क अब रिवर राफ्टिंग का अहसास कराती है। 

आज जब एक ट्रैक्टर-ट्रॉली यहाँ से गुजर रही थी, तो वह अचानक अनियंत्रित होकर गहरे गड्ढे में समा गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चालक की सूझबूझ से ट्रैक्टर पलटने से बच गया, वरना बड़ी जनहानि हो सकती थी। ​ इस मुख्य मार्ग से प्रतिदिन लगभग 50 गाँवों के हजारों लोग गुजरते हैं।रोजाना 100 से अधिक ऑटो-रिक्शा और फॉर-

व्हीलर हिचकोले खाते हुए यहाँ से निकलते हैं, जिससे गाड़ियों के पुर्जे ढीले हो रहे हैं और सवारियों की कमर टूट रही है। घुटनों तक भरे गंदे पानी और कीचड़ के बीच से होकर छोटे बच्चे स्कूल जाने को मजबूर हैं।
​  जनता का आक्रोश "हम सरकार को हर चीज का टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में हमें कीचड़ और गड्ढे मिल रहे हैं। क्या

 प्रशासन हमारे जान की कीमत तब समझेगा जब यहाँ कोई बड़ी अनहोनी हो जाएगी? अब गाड़ियों की जगह नाव खरीदने की नौबत आ गई है।"आए दिन बाइक सवार इस कीचड़ में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। और विभाग कुंभकर्णी की नींद सोया हुआ है।

सड़कों की यह हालत रातों-रात नहीं हुई है, बल्कि लंबे समय की लापरवाही का नतीजा है। अब देखना यह है कि क्या उच्चाधिकारी इस 'नर्क' बन चुकी सड़क का संज्ञान लेंगे या फिर सहसवान की जनता को इसी तरह 'जल-क्रीड़ा' करते हुए अपनी मंजिल तय करनी होगी।
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