बैठक में जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना की भी समीक्षा की गई।

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बैठक में जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना की भी समीक्षा की गई।

Thursday, April 9, 2026 | April 09, 2026 Last Updated 2026-04-10T06:20:24Z
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बैठक में जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना की भी समीक्षा की गई
लखनऊ । उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्ण ने सड़क हादसों को रोकने में नाकाम पांच अलग अलग जिलों में तैनात इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर कर दिया और दो सीओ के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। 

डीजीपी ने ये कार्रवाई बुधवार को सभी जोनल अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त, क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उप महानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्मय से हो रही अपराध की समीक्षा बैठक के दौरान की।

बैठक में जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना की भी समीक्षा की गई। 1 जनवरी 2026 से शुरू इस अभियान के तहत 487 दुर्घटना प्रभावित थानों में सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं, लेकिन 46 थानों में दुर्घटनाएं बढ़ीं और 5 थानों में तो अत्यधिक वृद्धि दर्ज की गई। डीजीपी ने इन पांच लापरवाह थाना प्रभारियों को तुरंत लाइन हाजिर करने के निर्देश दिए।

 इसमें वाराणसी में चोलापुर के थाना प्रभारी दीपक कुमार, गोरखपुर के कैम्पियरगंज थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह, कन्नौज के छिबरामऊ थाना प्रभारी विष्णुकांत तिवारी, बाराबंकी रामसनेही घाट थाना प्रभारी जगदीश प्रसाद शुक्ला और जौनपुर जिले के सिकरारा थाना प्रभारी उदय प्रताप सिंह शामिल हैं।

इसके अलावा बाराबंकी के क्षेत्राधिकारी यातायात आलोक कुमार पाठक और जौनपुर के क्षेत्राधिकारी यातायात गिरेंद्र कुमार सिंह के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए। डीजीपी ने साफ कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में अपेक्षित सुधार न करने वालों पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

डीजीपी राजीव कृष्ण ने IGRS और जनशिकायत निस्तारण प्रणाली में गुणवत्ता व पारदर्शिता बनाए रखने पर विशेष बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खुद जनसुनवाई करें और शिकायतों का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करें। कुछ जनपदों में सुधार की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि थाना-चौकी स्तर पर शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण प्राथमिकता रहे।

मीडिया प्रबंधन पर डीजीपी ने कहा कि किसी भी घटना की तथ्यात्मक, अद्यतन और प्रमाणिक जानकारी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से समय पर उपलब्ध कराई जाए। अधिकृत अधिकारी समयबद्ध बाइट दें, ताकि पुलिस की कार्यवाही सही ढंग से सामने आए। सोशल मीडिया पर सही तथ्यों को अपडेट कर हर महत्वपूर्ण पोस्ट पर रिप्लाई किया जाए।
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