बदायूं के कस्बा ककराला में समाज सुधार कार्यक्रम: दहेज उन्मूलन, नशा मुक्ति और भाईचारे का संदेश

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बदायूं के कस्बा ककराला में समाज सुधार कार्यक्रम: दहेज उन्मूलन, नशा मुक्ति और भाईचारे का संदेश

Wednesday, April 22, 2026 | April 22, 2026 Last Updated 2026-04-22T10:52:41Z
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बदायूं के कस्बा ककराला में समाज सुधार कार्यक्रम: दहेज उन्मूलन, नशा मुक्ति और भाईचारे का संदेश
ककराला बदायूं अमन कमेटी ककराला के तत्वावधान में समाज सुधार विषय पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ककराला एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में दहेज प्रथा, नशा मुक्ति, समाज सुधार और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर वक्ताओं ने प्रभावशाली विचार प्रस्तुत किए।


कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुफ्ती मिनहाज कासमी ने अपने संबोधन में कहा कि समाज की बुराइयों को समाप्त करने के लिए जागरूकता और आपसी सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से दहेज प्रथा को जड़ से खत्म करने का आह्वान किया।

मौलाना डॉ. यासीन अली उस्मानी साहब ने कहा कि नशा एक ऐसी सामाजिक बुराई है जो परिवार और समाज दोनों को बर्बाद कर देती है, इसलिए इससे दूर रहना और समाज को जागरूक करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

मौलाना आदम मुस्तफा साहब फिरोज़ाबादी ने अपने वक्तव्य में कहा कि सभी धर्म इंसाफ और बराबरी का संदेश देते हैं, इसलिए विरासत का सही और न्यायपूर्ण बंटवारा सुनिश्चित करना आवश्यक है।

मौलाना वसीम अहमद फलाही (एडवोकेट, रामपुर) ने कहा कि कानून और समाज दोनों ही दहेज प्रथा के खिलाफ हैं, ऐसे में हम सभी को मिलकर इस कुप्रथा को समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए।

पंडित आचार्य प्रणव मिश्रा (राष्ट्रीय प्रवक्ता) ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर देते हुए कहा कि आपसी भाईचारा ही देश की असली ताकत है और इसे मजबूत करना हम सबकी जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर ककराला एवं आसपास के क्षेत्रों के गणमान्य नागरिकों, विभिन्न गांवों के लोगों तथा सामाजिक व धार्मिक व्यक्तियों ने बढ़-चढ़कर भाग लेकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अलीगढ़ से आए एएसएम ग्रुप के संस्थापक मौलाना अफरोज ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में फरहत महमूद (सेक्रेटरी, अमन कमेटी ककराला) का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने पूरे आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन कारी मोहम्मद रिजवान खान (इमाम-खतीब, मस्जिद काले खान) ने कुशलतापूर्वक किया।

कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ पत्रकार हामिद अली खान राजपूत ने हिंदू-मुस्लिम एकता के नारे लगवाकर पूरे माहौल को उत्साह और भाईचारे से भर दिया। इसके पश्चात डॉ. यासीन अली उस्मानी ने दुआ कर कार्यक्रम का समापन कराया।
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