आधी रात हो या दिन—हर पुकार पर तैयार “रक्तदान टीम धमोरा”

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आधी रात हो या दिन—हर पुकार पर तैयार “रक्तदान टीम धमोरा”

Wednesday, April 15, 2026 | April 15, 2026 Last Updated 2026-04-16T06:45:36Z
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आधी रात हो या दिन—हर पुकार पर तैयार “रक्तदान टीम धमोरा”
1500 से अधिक जिंदगियां बचाकर बनी मानवता की मिसाल

मिलक (मुरादाबाद न्यूज़ प्राइम )
अमित कुमार जोशी
आज के दौर में जहां जरूरत पड़ने पर अपने भी साथ छोड़ देते हैं, वहीं मिलक क्षेत्र के धमोरा गांव की “रक्तदान टीम धमोरा” मानवता की एक ऐसी मिसाल बनकर उभरी है, जिसने निस्वार्थ सेवा की नई परिभाषा गढ़ दी है। टीम के संयोजक विकल श्रीवास्तव और उनके साथियों ने बीते दो वर्षों में 1500 से अधिक मरीजों को रक्त उपलब्ध कराकर उनकी जान बचाई है।

 आधी रात को पहुंची टीम, बचाई जान

ताजा मामला ग्राम जादौंपुर निवासी जितेन्द्र राजपूत के परिवार का है। उनके भाई का एक हादसे में पैर गंभीर रूप से घायल हो गया और अत्यधिक रक्तस्राव के चलते हालत नाजुक हो गई। परिजन आनन-फानन में उन्हें केमरी स्थित अस्पताल में भर्ती तो करा पाए, लेकिन रात के समय रक्त की व्यवस्था के लिए भटकते रहे।

जब सभी प्रयास विफल हो गए, तब जितेन्द्र ने “रक्तदान टीम धमोरा” से संपर्क किया। सूचना मिलते ही टीम के सदस्य बिना देर किए सक्रिय हो गए।

 रात 1 बजे अस्पताल पहुंचकर किया रक्तदान

विकल श्रीवास्तव अपने साथियों के साथ निजी वाहन से रात करीब 1 बजे अस्पताल पहुंचे। इस दौरान टीम के युवा सदस्य शिवम मौर्य ने पहली बार रक्तदान कर मरीज की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। समय पर रक्त मिलने से मरीज की हालत में सुधार हुआ और परिजनों ने राहत की सांस ली।

 निस्वार्थ सेवा से बन रहे प्रेरणा स्रोत

रक्तदान टीम धमोरा न केवल परिचितों बल्कि अनजान लोगों की भी मदद करती है। बिना किसी स्वार्थ के यह टीम हर जरूरतमंद के लिए हमेशा तैयार रहती है। विकल श्रीवास्तव का कहना है—
"चाहे आधी रात हो या दिन, जब भी किसी को जरूरत होगी, हमारी टीम हमेशा साथ खड़ी मिलेगी।"

 समाज में बढ़ रही सराहना

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब रिश्तों में भी स्वार्थ नजर आने लगा है, ऐसे समय में विकल श्रीवास्तव और उनकी टीम उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आई है।

 टीम के सक्रिय सदस्य

इस दौरान टीम के सदस्य दीपू गुप्ता, अनिकेत भारती, ऋषभ मौर्य, शिवम मौर्य सहित अन्य युवा भी मौजूद रहे, जो लगातार सेवा कार्यों में जुटे हैं।
“रक्तदान टीम धमोरा” ने यह साबित कर दिया है कि मानवता आज भी जिंदा है। उनके जज्बे और समर्पण से समाज को नई दिशा और प्रेरणा मिल रही है।
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