एजेंटों के जरिए लोगों से जमा कराया गया था करोड़ों रुपये, रकम लौटाने का समय आया तो कंपनी बंद कर फरार हुए शशिकांत और सूर्यकांत मौर्य; दोनों पर था 50-50 हजार रुपये का इनाम

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एजेंटों के जरिए लोगों से जमा कराया गया था करोड़ों रुपये, रकम लौटाने का समय आया तो कंपनी बंद कर फरार हुए शशिकांत और सूर्यकांत मौर्य; दोनों पर था 50-50 हजार रुपये का इनाम

Tuesday, September 8, 2026 | September 08, 2026 Last Updated 2026-09-09T02:17:17Z
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संवाददाता कौशल पाराशरी  यूपी हेड 

एजेंटों के जरिए लोगों से जमा कराया गया था करोड़ों रुपये, रकम लौटाने का समय आया तो कंपनी बंद कर फरार हुए शशिकांत और सूर्यकांत मौर्य; दोनों पर था 50-50 हजार रुपये का इनाम


बदायूं। जिले के बहुचर्चित अमर ज्योति चिटफंड कंपनी प्रकरण में लंबे समय से फरार चल रहे कंपनी के दो संचालक भाइयों को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। कंपनी के जरिए लोगों से 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित ठगी के आरोपित शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य को एसटीएफ नोएडा यूनिट और बदायूं कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है। दोनों भाइयों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था।

आरोप है कि दोनों भाइयों ने बदायूं शहर के मीरासराय क्षेत्र में अमर ज्योति नाम से चिटफंड कंपनी संचालित की थी। कंपनी से बड़ी संख्या में एजेंटों को जोड़ा गया और इन्हीं एजेंटों के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए प्रेरित कर उनकी गाढ़ी कमाई जमा कराई गई। बताया जाता है कि कंपनी से जुड़े एजेंटों की संख्या 200 से अधिक थी।

कई वर्षों तक निवेशकों का पैसा जमा कराने के बाद जब रकम वापस करने का समय आया तो कंपनी के संचालकों पर कार्यालय बंद कर फरार होने का आरोप लगा। इसके बाद धीरे-धीरे निवेशकों को अपने साथ हुई कथित ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों से कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।

निवेशकों की शिकायतों के बाद दर्ज हुए मुकदमे
मामला सामने आने के बाद कोतवाली में कंपनी संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने समेत विभिन्न आरोपों में मुकदमे दर्ज किए गए। अब तक इस मामले में चार मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है।

जांच के दौरान पुलिस ने कंपनी से जुड़े आठ एजेंटों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, लेकिन कंपनी के मुख्य संचालक दोनों भाई लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहे थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए उनके द्वारा न्यायालय की शरण लेने की भी चर्चा रही।

200 करोड़ से अधिक की रकम का आरोप
पीड़ितों और जांच से जुड़े आरोपों के अनुसार कंपनी के माध्यम से लोगों से 200 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जमा कराई गई थी। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में एजेंटों का नेटवर्क बनाया गया था। लोग अपनी बचत और गाढ़ी कमाई को सुरक्षित निवेश की उम्मीद में कंपनी में जमा कराते रहे।

बताया जाता है कि जब निवेशकों को अपनी जमा रकम वापस मिलने की उम्मीद थी, उसी दौरान कंपनी के संचालक कथित रूप से कंपनी बंद कर फरार हो गए। रकम का आंकड़ा लगातार बढ़ने के कारण यह मामला बदायूं के बड़े वित्तीय ठगी मामलों में शामिल हो गया।

बरेली के रहने वाले बताए जा रहे दोनों भाई
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए दोनों भाई बरेली के कटरा चांद खां क्षेत्र के निवासी बताए जाते हैं। शशिकांत और सूर्यकांत मौर्य ने बदायूं में कंपनी का नेटवर्क खड़ा किया और एजेंटों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच बनाई।

दोनों के फरार होने के बाद पुलिस ने उनकी तलाश तेज की और गिरफ्तारी पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया। लंबे समय से फरार चल रहे दोनों भाइयों की गिरफ्तारी को इस बहुचर्चित प्रकरण में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।

अब खुल सकती हैं ठगी की कई परतें
दोनों मुख्य आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच में कथित ठगी के नेटवर्क, निवेशकों की संख्या, जमा कराई गई वास्तविक धनराशि और कंपनी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की संभावना है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है।

मामले को लेकर अतीत में कुछ राजनीतिक लोगों के संरक्षण से जुड़े आरोप और चर्चाएं भी सामने आई थीं। हालांकि, ऐसे आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। अब दोनों मुख्य संचालकों की गिरफ्तारी के बाद जांच में इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी नजर रहेगी।

एसएसपी अंकिता शर्मा ने बताया कि दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। अग्रिम विधिक कार्रवाई पूरी करने के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया जाएगा।

दोनों भाइयों की गिरफ्तारी से उन हजारों निवेशकों में उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से अपनी जमा पूंजी वापस मिलने और मामले में कार्रवाई का इंतजार कर रहे थे। अब सबकी निगाहें पुलिस की आगे की जांच और कथित रूप से ठगी गई रकम के संबंध में सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं।
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