संवाददाता राजेश गुप्ता ब्यूरो चीफ बदायूं
बदायूँ: अवैध कब्जों और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ तीसरे दिन भी भाकियू (चढूनी) का अनिश्चितकालीन धरना जारी
प्रशासन को दी चेतावनी: पैमाइश कराकर अतिक्रमण न हटाया गया तो संगठन करेगा उग्र आंदोलन
बीएसएनएल दफ्तर के पीछे सरकारी जमीन, सार्वजनिक रास्ते और मुख्य नाले पर अवैध कब्जे का आरोप
बदायूँ (11 अक्टूबर):
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के जिलाध्यक्ष सतीश साहू के नेतृत्व में बदायूँ स्थित मालवीय आवास गृह पर अवैध कब्जों और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ चल रहा अनिश्चितकालीन धरना आज तीसरे दिन भी कड़े तेवर के साथ जारी रहा। धरने पर बैठे किसान नेताओं और स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर ढिलाई का आरोप लगाते हुए सरकारी भूमि को जल्द से जल्द अतिक्रमण मुक्त कराने की पुरजोर मांग की है।
भू-माफियाओं पर ढील देने का आरोप, जिलाध्यक्ष सतीश साहू के कड़े तेवर
धरने का नेतृत्व कर रहे जिलाध्यक्ष सतीश साहू ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा:
"सरकारी जमीनों, सार्वजनिक रास्तों और नालों पर अवैध कब्जे कतई बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। प्रशासन आँख मूंदकर बैठा है, जिससे भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। यदि जल्द से जल्द निष्पक्ष पैमाइश कराकर कब्जे नहीं हटाए गए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।"
क्या है पूरा मामला?
धरने में मौजूद वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बीएसएनएल कार्यालय के पीछे नई सराय क्षेत्र में स्थित सरकारी भूमि, आठ फीट चौड़े सार्वजनिक रास्ते और मुख्य नाले पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है।
दिलशाद अब्बासी ने कहा कि रास्ता बंद कर अस्पताल के पास की सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया है।
शरीफ अब्बासी ने आरोप लगाया कि अस्पताल परिसर में संचालित मेडिकल स्टोर भी सरकारी जमीन पर बना है, जिससे आम जनता का आवागमन पूरी तरह बाधित हो रहा है।
भविष्य में जलभराव का बढ़ा खतरा
किसान नेताओं ने चिंता जताते हुए कहा कि मुख्य नाले की जमीन पर निर्माण होने से उसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। यदि समय रहते इसे नहीं हटाया गया, तो आने वाले दिनों में आसपास की कॉलोनियों में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी।
भाकियू (चढूनी) की प्रमुख मांगें:
निष्पक्ष पैमाइश: बीएसएनएल कार्यालय के पीछे स्थित सरकारी जमीन और सार्वजनिक रास्तों की तत्काल निष्पक्ष नाप कराई जाए।
अतिक्रमण मुक्ति: सार्वजनिक रास्ते और मुख्य नाले को तुरंत अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाए।
कड़ी कानूनी कार्रवाई: सरकारी संपत्ति और रास्तों पर कब्जा करने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
प्रेमा की भूमि मामला: भगवान दास प्रेमा के नेतृत्व में प्रेमा की जमीन से अवैध कब्जा हटवाने की मांग पर भी त्वरित निस्तारण किया जाए।
धरने में ये लोग रहे मौजूद
इस दौरान जिलाध्यक्ष सतीश साहू के साथ बीयीशुदास, लईल अब्बासी, दिलशाद अब्बासी, यादवेंद्र सिंह, नूरुद्दीन, शरीफ, भगवान दास प्रेमा, परवेज, बादशाह, कल्लू, जुबैर, अबरार, सुभान, मुनव्वर, नौशाद, इस्लाम रजा और ताहिर अब्बासी शरिफ अब्बासी,फैज अब्बासी, अरमान अब्बासी,आजम अब्बासी,सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक एवं संगठन के कार्यकर्ता मौजूद रहे।