परिवाहन निगम बस स्टेशन प्रारंभ कराए जाने के लिए सिविल जज जूनियर डिविजन के न्यायालय मे दायर की गई जनहित याचिका।
सहसवान निगम के प्रबंध निदेशक सहित दो अन्य अधिकारियों को बनाया पक्षकार। भूमि विकास बैंक के प्रबंधक समाजसेवी रमा कृष्ण सक्सेना ने सिविल जज जूनियर डिविजन की अदालत में एक जनहित याचिका दायर करते हुए
पांच दशक पूर्व बदायूं जनपद के सबसे पुरानी उत्तर प्रदेश परिवहन निगम बस स्टेशन के बंद पड़े होने पर उसे सुचारू किए जाने के साथ ही बसों का संचालन कराए जाने की मांग की है।
वाद में प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश परिवहन निगम लखनऊ क्षेत्रीय प्रबंधक सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक बरेली बदायूं को पक्षकार बनाते हुए न्यायालय ने पक्षकारों को नोटिस जारी किए हैंल
समाजसेवी रमा कृष्ण सक्सेना ने सिविल जज जूनियर डिविजन न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवीण कुमार गौतम की अदालत में दायर की गई
जनहित याचिका में न्यायालय को बताया की बदायूं जनपद की सहसवान नगर तहसील बाजार बिशुनगंज के मध्य स्थित उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम का 50 साल पुराना परिवहन निगम बस स्टेशन है।
पांच दशक से स्टेशन पर दिल्ली बिल्सी आगरा मुरादाबाद बरेली अलीगढ़ बदायूं के लिए बसों का संचालन होता था। जिससे काफी तादाद में निगम को आय होती थी।
परंतु अधिकारियों की लापरवाही के चलते बीते एक दशक से स्टेशन पर स्टाफ की तैनाती न होने से बसों का संचालन बंद हो गया। बसों का संचालन बंद होते ही जहां यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। वही पांच दशक पूर्व स्थापित परिवहन निगम बस स्टेशन दिनों दिन खंडहर होता चला जा रहा है।
इस खंडहर होते स्टेशन से भारी तादाद में असामाजिक तत्व संपत्ति भी यदा-कदा चोरी कर ले जाते हैं। अधिकांश समय उपरोक्त स्टेशन पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है।
निगम की बसें स्टेशन पर न आकर नगर के मध्य एक 1 किलोमीटर दूर बदायूं-मेरठ राजमार्ग पर स्थित शहबाजपुर चौकी अकबराबाद चौराहा टोल नंबर 4 पर बसें यात्रियों को उतारकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो जाती हैं।
खासकर छोटे नन्हे मुन्ने बच्चों के साथ ही महिलाओं व बालिकाओं को रात के समय आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बस स्टेशन प्रारंभ कराए जाने के लिए नगर के संभ्रांत लोगों द्धारा अनेकों बार जनप्रतिनिधियों अधिकारियों को ज्ञापन लिखित एवं मौखिक रूप में प्रेषित किए गए।
परंतु किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने नगर की जनता का दर्द नहीं समझा नगर के संभ्रांत लोगों ने सिर्फ न्यायालय पर भरोसा करते हुए