रणनीति और कूटनीति के भंवर में लव जिहाद की बू
जर-जोरू और जमीन, यही तो है
सब फसाद की जड़ लेकिन एटा में कुछ इससे भी हट कर हो रहा है। जिसे समझ पाना एटा जैसे पिछड़े जिले के लोगों के दिमाग़ से बहुत दूर की कोड़ी है। बहुत ही सरल और सीधे लोगों के बीच में कुछ ऐसे भी शातिर दिमाग़ के लोग पल बढ़ रहें है जो दिखाई देने में आप हम सबको अनजानें से लगते है।लेकिन आपके अस्तित्व पर सवाल खड़े करनें के लिए यह घटना काफी है और अचंभित भी करेंगी।
इस स्टोरी में कई किरदार है लेकिन एक किरदार नें सभी किरदारों को साधने का प्रयास किया है। परंतु जब यह घटना हमारे मंच के प्रतिनिधि के पास आई तो दिमाग़ चकरा गया था। पूरी कहानी को विस्तार से समझने के लिए हमारे सहयोगियों नें 24 घंटे से ऊपर खर्च किये।
यह कहानी काल्पनिक नहीं है। जीवित प्राणियों से संबधित है, जनपद एटा के विजय नगर कालोनी में एक ब्राह्मण परिवार रहता है। जिस परिवार में कुल पाँच लोग रहतें थे। वक्त नें इस परिवार के हेड ऑफ़ फेमिली को आकस्मिक अपनी गोद में समा लिया। इस परिवार का बुरा वक्त यही से प्रारम्भ होता है और कुछ लालची परिंदे इस परिवार को नोंचने खाने की फिराक में लग जाते है। समय के आगोश से निकले इन परिंदो नें इस परिवार की दो छोटी-छोटी मासूम बच्चियों को अपने प्रेम जाल में फसाना शुरू किया। फिर शुरू होता है…शोषण और हवस का खेल, इन बच्चियों की माँ.. जो अपने पति के दुःख से दुःखी यही नहीं समझ पा रही थी कि इन बच्चियों की परवरिश कैसे होंगी लेकिन शातिर परिंदो नें इस माँ पर भी हवसी जाल फैकना शुरू कर दिया और वो सभी सफल भी रहें। सबसे पहले शहर एटा का ही मुस्लिम लड़के नें इस ब्राह्मण परिवार की नावालिक बेटी इतिका दीक्षित को अपने प्रेम जाल में फसाया,फिर बड़ी बेटी मगधी दीक्षित को भी प्रेम जाल में फसा लिया। जब इस रिपोर्ट पर सूत्रों नें नजर गड़ाई तो बहुत कुछ सामने आने लगा यहाँ तक की सबूतों का ढेर लग गया।
*खेल हवस और सम्पति था?*
इतिका दीक्षित के लिए एक मुस्लिम लड़के नें सोशल मिडिया इंट्राग्राम का सहारा लिया और प्रेम जाल बनाया और लड़की को फास भी लिया।फिर खेल में रोड़ा बन रही इतिका दीक्षित की बड़ी बहन मगधी दीक्षित को भी शामिल कर लिया गया। इस खेल की बड़ी कड़ी थी इन बेटियों की माँ..... जो बीमार भी है और मानसिक इलाज भी आगरा में चल रहा है। *गुलफाम कुरैशी नाम के लड़के नें सबसे पहले इन लड़कियों पर दवाब बना कर गाँव की सम्पति को सेल कराया जिसकी कीमत बेचने के समय *5000000* ₹ के करीब थी। बेच दी गई.... रकम हड़प ली गई.
इन *लव जिहाद* में फ़सी नावालिक लड़कियों की सम्पति का पहला टुकड़ा बेचा गया...
*1- 14/7/2022*
(कीमत करीब-15 लाख)
दूसरा टुकड़ा भी उसी दिन बेचा गया...
*2- 14/7/2022*
(कीमत करीब -12 लाख)
तीसरा टुकड़ा बेचा गया....
*3-10/8/2022*
(कीमत करीब 20 लाख)
आखिर में जब कुछ नहीं बचा तो विजय नगर में स्थित मकान का बैनामा भी करा दिया गया...
*4- 30/8/2022 को*
(कीमत करीब-1.20 करोड़)
*पूरे खेल के बंदरबाँट में रायता बिखर गया*
गुलफाम कुरैशी अपने खेल में चौकसी वरत रहा था लेकिन यह खेल बिगड़ गया एक होटल मालिक और पत्रकार की एंट्री से.... जब इस लव जिहाद का पता उक्त पत्रकार को लगा तो ब्लैक मेल का खेल शुरू होता है क्योंकि सारी जमीन तो बेच दी गई थी लेकिन विजय नगर का मकान बचा था। पूरे खेल पर पर्दा डालने के एवज में उक्त पत्रकार द्वारा मकान का बैनामा 30/8/2022 को करा लिया गया।होटल मालिक की एंट्री भी इसी खेल के हिस्सेदारी में आता है। जो कि मकान के बैनामा में बतौर गवाह बना है। लेकिन गुलफाम कुरैशी का खेल था हवस और सम्पति जो कि होटल मालिक अपने होटल में पूरा भी करा रहा है लेकिन मकान के हवस में पत्रकार भूल गये कि भारत का क़ानून और बुजुर्ग बहुत कुछ मरने से पहले ही कर जाते है
*वसीयत.....या यूं कहें स्व.मनोज दीक्षित की आत्मा की आखिरी लड़ाई*
इस पूरे लव जिहाद के प्रकरण में नावालिक लड़कियों के अलावा स्व.मनोज दीक्षित के बेटे अर्नब दीक्षित के नाम दादी स्व.केला देवी मरने से पहले वसीयत कर गई है।जो जिन्न की तरह सामने आ गया है। क़ानून के पेच अगर सही जगह कसे गये तो फिर जेल और सजा दोनों ही सभी को होंगी। क्योंकि वालिक बना व फर्जी कागजात लगा कर बैनामा किया गया है।
*कुछ समझ में आया कि किस तरह से सम्पति और हवस के लिए आपकी बेटियों को बहकाया जा रहा है और इन सब में शामिल है शहर के ही मासूम से दिखने वाले पत्रकार और व्यवसाई।*
इस स्टोरी में देखिए आपकी बेटी भी हो सकती है आपका घर भी होगा और आपकी सम्पति भी होंगी। सिर्फ अपना चश्मा बदल लीजिये। क्योंकि दरिंदे और गद्दार का कोई रिश्ता नहीं होता है।आप जिन लोगों की सिफारिश में लगे है वो आपकी बेटी के साथ ही रेप कर रहें है। बस दृश्य महसूस कीजिये।
आगे कि खबर में सबूत और माफियाओ के चेहरे भी आपके सामने लाएगा।
संवाददाता आशीष तिवारी