प्रजाति पूसा 1692 तथा पूसा 1718 बासमती धान का पांच पांच किग्रा बीज प्रदर्शन हेतु जनपद की 40 किसानों को किया गया निशुल्क वितरण

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प्रजाति पूसा 1692 तथा पूसा 1718 बासमती धान का पांच पांच किग्रा बीज प्रदर्शन हेतु जनपद की 40 किसानों को किया गया निशुल्क वितरण

Saturday, June 17, 2023 | June 17, 2023 Last Updated 2023-06-17T11:14:59Z
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प्रजाति पूसा 1692 तथा पूसा 1718 बासमती धान का पांच पांच किग्रा बीज प्रदर्शन हेतु जनपद की 40 किसानों को किया गया निशुल्क वितरण

कृषि विज्ञान केंद्र धमोरा रामपुर द्वारा इस बार विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से कृषकों को बांसमति धान के उत्पादन के विषय में विस्तृत जानकारी दी गई है। केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि बासमती धान की प्रजाति पूसा 1692 और पूसा 1718 का 5-5 किलोग्राम बीज प्रदर्शन हेतु


जनपद के विभिन्न ग्रामों के 40 कृषकों को नि:शुल्क वितरण किया गया है। इसके अलावा बासमती धान की तीन नवीनतम प्रजातियों पूसा 1885, पूसा 1886 और पूसा 1847 को परीक्षण हेतु 15 कृषको को नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया है। डॉक्टर नरेंद्र सिंह गंगवार ने किसानों को वितरित की गई 3 नई प्रजाति की विशेषताओं के बारे में भी बताया उन्होंने कहा


 कि पूसा 1885 प्रजाति पूसा बासमती 1121 का उन्नत रूप है। यह बैक्टीरियल ब्लाइट एवं ब्लास्ट के लिए प्रतिरोधी है। उन्होंने कहा यह मध्यम लंबाई वाली प्रजाति है।इसके बीज से बीज बनने तक एवं पकने में यह 135 दिन का समय लेती है। इसकी औसत पैदावार 40.8 कुंतल प्रति हेक्टेयर है।


उन्होंने कहा पूसा बासमती 1886 प्रजाति पूसा बासमती 6 का उन्नत रूप है। यह पकने में 145 दिन का समय लेती है। यह जीवाणु झुलसा एवं झोंका रोग के लिए प्रतिरोधी है। इसकी औसत पैदावार 45 कुंतल प्रति हेक्टेयर है। इसके अलावा उन्होंने पूसा बासमती 1847 के बारे में कहा की यह प्रजाति वर्ष 2021 में अनुमोदित हुई है। यह प्रजाति पूसा बासमती 1509 का उन्नत स्वरूप है।

जीवाणु झुलसा एवं झोंका रोग की प्रति सहनशील है। यह जल्दी पकने वाली प्रजाति है। उन्होंने बताया कि इस की औसत पैदावार 57 कुंटल प्रति हेक्टेयर है। पूसा बासमती 1692 के बारे में बताया कि यह बासमती 2020 में अनुमोदित की गई है। यह प्रजाति पकने में 110 से 115 दिन का समय लेती है।


 यह झोंका रोग के लिए मध्यम अवरोधित है। यह प्रजाति गर्दन तोड़ रोग के लिए सहनशील है। इसके प्रत्येक पौधे में 15 से 18 कल्ले बनते हैं। पूसा बासमती 1121 से 15% तक अधिक पैदावार देती है इसका चावल पकने के बाद औसतन 17 मिलीमीटर तक लंबा होता है


इसको पूसा बासमती 1509 के विकल्प के रूप में अपनाया जा सकता है। इसके बाद पूसा बासमती 1637 के बारे में कहा कि प्रजाति पूसा बासमती 1 का उन्नत स्वरूप है। यह ब्लास्ट एवं गर्दन तोड़ रोग के प्रति रोग प्रतिरोधी है। पूसा बासमती 1121 के बारे में बताया कि यह बासमती लाइन की गुणवत्ता की दृष्टि से लैंडमार्क प्रजाति है।


यह बासमती 370 एवं टाइप 3 की संकरण द्वारा विकसित की गई है। इसका चावल 9 मिलीमीटर लंबा जो पकने के बाद 22 मिलीमीटर तक लंबा हो जाता है। यह प्रजाति पकने में 140 दिन से 145 दिन का समय लेती है। इसकी औसत पैदावार 50 कुंतल प्रति हेक्टेयर है।


इस प्रजाति के पौधे की लंबाई 120 सेंटीमीटर तक होती है। और पूसा बासमती 1718 के बारे में बताया की प्रजाति पकने में 136 से 138 दिन का समय लेती है। इसकी औसत पैदावार 45 से 50 कुंतल प्रति हेक्टेयर है।


इस चावल की लंबाई 8.1 मिलीमीटर जो पकने के बाद 17 मिलीमीटर तक हो जाती है। 
पूसा बासमती 1 प्रजाति के विकल्प के रूप में पूसा 1837 को अपनाया जा सकता है। पूसा 1509 की विकल्प के रूप में पूसा 1847 को लिया जा सकता है। पूसा 1121 की विकल्प के रूप में पूसा 1718 एवं पूसा 1885 को लिया जा सकता है।
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