अपने भाव को नरम रखना प्रत्येक मानव का कर्तव्य है

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अपने भाव को नरम रखना प्रत्येक मानव का कर्तव्य है

Wednesday, September 20, 2023 | September 20, 2023 Last Updated 2023-09-20T16:29:01Z
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सम्भल बहजोई/उत्तर प्रदेश

अपने भाव को नरम रखना प्रत्येक मानव का कर्तव्य है

 दसलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की हुई चर्चा।
*बहजोई:* दसलक्षण पर्व के दूसरे दिन मार्दव धर्म के बारे में प्रवचन करते हुए कहा कि अभिमान को त्यागना उत्तम मार्दव धर्म है।

नगर के मौहल्ला गोलागंज स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर में दसलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया, इस अवसर पर जैन सभा के महामंत्री सम्भव जैन को सौधर्म इंद्र बनाया गया एवं प्रथम अभिषेक एवं शांति धारा का सौभाग्य प्रदान किया गया,ललितपुर के विद्धान पंडित अशोक जैन शास्त्री ने उत्तम मार्दव धर्म के बारे में बताते हुए कहा कि मृदुभाव आत्मा का स्वभाव हे, मृदुता आत्मा के सरल परिणाम को कहते हैं।


समस्त जीवों में हमेशा मृदुभाव अर्थात् सरल भाव रखना चाहिए, कठोर भाव का त्याग करना चाहिए। मार्दव धर्म आत्मा अर्थात् निजात्मा स्व-स्वरूप का धर्म है। जहाँ मृदु भाव या नम्रता नहीं है वहाँ धर्म भी नहीं है। विनम्रता को देखकर शत्रु भी मित्र बन जाते हैं।


 जैन सभा के महामंत्री सम्भव जैन ने कहा कि अपने भाव को नरम रखना प्रत्येक मानव का कर्तव्य है। अहंकार त्यागने का अर्थ यह है कि मनुष्य अपने को दूसरों से श्रेष्ठ एवं बुद्धिमान् और दूसरों को अपने से तुच्छ एवं मूर्ख समझ कर उनको अपमानित न करे,


 अधिकारी तथा धन सम्पन्न होकर भी स्वामित्व का गर्व प्रदर्शित न करे। तदोपरांत अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । इस अवसर पर इस अवसर पर पहुप जैन, सुनील जैन, राजेंद्र जैन, संजय कुमार जैन, सम्भव जैन, मीतेश जैन, मनोज जैन,


अभिलाषा जैन, राहुल जैन, अर्पित जैन, हेमंत जैन, छाया जैन, रंजना जैन,सरिता जैन,शैली जैन, संतोष देवी जैन, विपुल जैन, आलोक जैन, विभोर जैन, प्रेरक जैन,आदि बड़ी संख्या में श्रावकगण उपस्थित रहे। अध्यक्षता सुनील जैन व संचालन सम्भव जैन ने किया।
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