मिलक (रामपुर)
ख़ालिक़े क़ाएनात ने ज़मीन के ऊपर जो इंसानों की तख़लीक़ फ़रमाई है उस का वाहिद मक़सद ख़ुदा की इबादत और उसकी बंदगी है, यह सबक़ याद कराने के लिए उस ने सिलसिलए नबूवत व रिसालत क़ाएम किया और दुनिया पर किताबें भेजी और सहीफ़े नाज़िल फ़रमाए,
शरिअतें उतारीं ताकि इंसानी नफ़्स की पाकीज़गी हो सके और उसका अख़लाक़ भी साफ़ सुथरा हो जाए। नफ़्स को पाक करने और ज़िंदगी को साफ़ सुथरे तरीक़े से गुज़ारने में तसव्वुफ़(सूफ़ी संतों का) का बहुत बड़ा योगदान है।
ज्ञात हो कि इसी संबंध में दरगाह सज्जादा नशीन व मुतावल्ली हजरत ख्वाजा मोहम्मद सबाहत हसन शाह एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अवगत कराया कि इसी सिलसिलए क़ादरिया के मशहूर सूफ़ी बुज़ुर्ग हज़रत ख़्वाजा मुहम्मद फ़साहत शाह
रहमतुल्लाह अलैह ने अपनी हयात में लोगों की ज़िंदगी को सुधारने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई आप बहुत सारे बे सहारा लोगों का सहारा बने और उन की मदद की और जो लोग सही रास्ते पर नहीं थे
उनको अपनी सोहबत में रख कर नेक रास्ते पर लगा दिया। आप एक बहुत बड़े अल्लाह के वली थे।आपकी ज़िंदगी करामातों से भरी पड़ी है जिनका ज़िक्र आज भी लोगों की ज़ुबान पर है।
गत वर्षो की भांति इस वर्ष भी हज़रत ख़्वाजा मुहम्मद फ़साहत हसन शाह रहमतुल्लाह अलैह का 23 वाँ सालाना उर्स मुबारक 9 जनवरी से 12 जनवरी तक भैंसोड़ी शरीफ़ तहसील मिलक जनपद रामपुर में