ऑनलाइन हुआ पशुओं का डाटा, छोड़ने पर होगी कार्रवाई
रामपुर। जिले में चार लाख पशुओं का डाटा मालिकों के आधार कार्ड से लिंक हो गया। एक क्लिक करते ही पशु और पशु मालिकों का पूरा डाटा सामने होगा। ऐसे पशुओं को जंगल में छुट्टा छोड़ने वालों को
अब हवालात की हवा खानी पड़ सकती है। पशुुओं के कान पर टैग लगाए गए हैं। पशुओं की चोरी रोकने और जंगल में छुट्टा पशु छोड़ने वालों पर अंकुश लगाने के लिए पशु पालन विभाग पशुओं की जियो टैगिंग कर रहा है।
रामपुर में गोवंशीय और महिषवंशीय पशुओं की तादाद चार लाख से ज्यादा है। इनमें 90 प्रतिशत पशुओं की जियो टैगिंग हो चुकी है। इतने पशु मालिकों के आधार कार्ड से भी लिंक भी हो चुके हैं। पशु चोरी हो जाए या जंगल में कोई छुट्टा छोड़ दे एक क्लिक करते ही उसका पूरा डाटा सामने आ जाएगा।
पशुओं के कान में जो टैग लगाए जा रहे हैं, उन पर 14 डिजिट का कोड दर्ज है। पशुओं और पशु पालकों का पूरा रिकाॅर्ड पशु पालन विभाग ऑनलाइन कर रहा है। सभी छुट्टा पशुओं की भी शीघ्र जियो टैगिंग प्रक्रिया पूरी होगी।
जियो टैगिंग के फायदे
जिन पशुओं की जियो टैगिंग नहीं होगी उन्हें मुहंपका-खुरपका के मुफ्त टीके, मुफ्त कृत्रिम गर्भाधान, बीमा, चारी और दवा का मुफ्त लाभ नहीं मिल सकेगा। इसलिए पशुओं की जियो टैगिंग जरूरी है।
-पशुओं को लगाए जाने वाले टैग पर कोड दर्ज होता है।
- कोड से पशुओं का पूरा ब्योरा मिल जाएगा।
- पशुओं के काम पर पीले रंग का टैग लगाया जाता है।
-पशु कब पैदा हुआ, कब उसे टीका लगा सारी जानकारी टैग से मिल जाएगी।
अब तक 90 प्रतिशत पशुओं की जियो टैगिंग कराई जा चुकी है। पशुओं को जंगल में छुट्टा छोड़ने वालों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज होगा।
ऐसे पशु पालक को जेल की हवा खानी पड़ेगी। बिना जियो टैगिंग पशुओं को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। - महेश कुमार कौशिक, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी