रामलीला मैदान की भूमि हो कब्ज़ा मुक्त : शंखधार

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रामलीला मैदान की भूमि हो कब्ज़ा मुक्त : शंखधार

Saturday, February 3, 2024 | February 03, 2024 Last Updated 2024-02-03T09:39:42Z
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रामलीला मैदान की भूमि हो कब्ज़ा मुक्त : शंखधार


मिलक। भारतीय किसान संघ रामपुर के जिला अध्यक्ष आदेश शंखधार ने सम्पूर्ण समाधान दिवस तहसील मिलक में पहुंच कर जिलाधिकारी जोगेन्द्र सिंह को एक पत्र सौंपकर नगर मिलक की बेशकीमती भूमि को कब्ज़ा मुक्त कराए जाने का अनुरोध किया है।

जिला अध्यक्ष आदेश शंखधार ने बताया कि नगर मिलक की बीचों बीच रामलीला मैदान उद्यान विभाग की गाटा संख्या 446 कुल क्षेत्रफल 0.2820 हे. भूमि है उक्त भूमि पर पिछले कई दशकों से श्रीरामलीला का मंचन,


तथा श्री श्याम बाबा का संकीर्तन आदि नगर मिलक के सभी धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। उक्त सरकारी भूमि पर कुछ दबंगों के द्वारा अवैध रूप से कब्ज़ा करके पक्का निर्माण कर लिया गया है। जिसको कब्ज़ा मुक्त कराए

जाने का अनुरोध भारतीय किसान संघ रामपुर द्वारा स्थानीय प्रशासन से बार बार किया गया लेकिन अभी तक उक्त सरकारी भूमि को कब्ज़ा मुक्त नहीं कराया गया है। जबकि भारतीय किसान संघ ने उक्त भूमि की पक्की पैमाईश के लिए बहुत प्रयास किया उसके बाद भी सिर्फ़ खानापूर्ति की गई वास्तव में इसकी पक्की पैमाईश ही न हो सकी।


 सिर्फ़ खानापूर्ति करने के बाद भी उक्त सरकारी भूमि 0.270 हे. कम पाई गई है। ऐसा लिखकर हमें तत्कालीन उपजिलाधिकारी मिलक राकेश कुमार गुप्ता द्वारा दिया गया है। आपको बताते चलें कि उक्त भूमि की जब पैमाईश कराई जा रही थी तब आदेश शंखधार जिला अध्यक्ष भारतीय किसान संघ, व्यक्तिगत रूप में मौके पर मौजूद थे

लेकिन जिन लोगों के द्वारा उक्त रामलीला मैदान की भूमि पर अवैध रूप से कब्ज़ा किया गया है वह लोग उन्हें जान से मारना चाहते थे इस कारण उन्हें उस समय मौके से जाना पड़ा इस कारण उक्त भूमि की पैमाईश में सिर्फ़ खानापूर्ति कर दी गई।


 उसके बाद भी उक्त रामलीला मैदान की भूमि कम पाई गई है। अगर इस भूमि की पक्की पैमाईश तहसील मिलक के अतिरिक्त अन्य किसी भी तहसील के राजस्व कर्मचारियों द्वारा कराई जाए तो उक्त भूमि और भी कम पाई जाएगी। ऐसा भरोसा है। पत्र में आग्रह किया गया है


कि उक्त भूमि की पक्की पैमाईश तहसील मिलक के अतिरिक्त अन्य किसी भी तहसील के राजस्व कर्मचारियों द्वारा कराकर रामलीला मैदान की सरकारी भूमि को कब्ज़ा मुक्त कराया जाए तथा इस भूमि को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से इसकी


 चहारदीवारी कराकर इसमें एक गेट लगा दिया जाए जिससे कि यह भूमि भी सुरक्षित रहेगी और नगर के सभी धार्मिक आयोजन भी ठीक प्रकार से संपन्न होते रहेंगे।
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