संविधान एक ऐसा ग्रंथ है जो दुनिया में सभी मजहब, मानव के लिए व्यवस्था, अधिकार व सम्मान देता है- राजेश सिद्बार्थ
लखनऊ 14 जून, 2014 डॉ आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के तत्वावधान में प्रेस क्लब हजरतगंज लखनऊ में गोष्ठी एवं प्रेसवार्ता किया गया।
गोष्ठी में मुख्य वक्ता पूर्व आईएएस बी०पी सिंह ने कहा कि डॉक्टर आंबेडकर जी द्वारा मात्र 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन में भारतीय संविधान तैयार किया गया था, जो कि दुनिया में सबसे बड़ा एवं मजबूत संविधान है। डा० भीमराव आंबेडकर उस समय रात दिन जग कर सारे मजहब समुदाय समाज को हित को दृश्टिगत रखते हुए संविधान का निर्माण किया था। भारत के संविधान को आज पूरी दुनिया लोहा मानती है।
इस दृष्ट से देखा जाए तो भारत का संविधान महा ग्रंथ के रूप में भारत को प्राप्त हुआ है जिससे न्यायपालिका कार्यपालिका विधायिका एवं देश की सारी राष्ट्रीय मशीनरी संचालित होती है इस संविधान में किसी प्रकार का किसी के लिए भेदभाव का स्थान है ही नहीं।
गोष्टी को संबोधित करते हुए रामचन्द्र पटेल राष्ट्रीय मुख्य संयोजक डा० आंबेडकर संवैधानिक महासंघ ने बताया कि 28 जनवरी 2024 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर 75
संवैधानिक रथ यात्रा राजधानी विधानसभा लखनऊ के सामने से रवाना कर पूरे लखनऊ में भ्रमण करते हुए प्रत्येक रथ एक रथ एक-एक जनपद में जाकर गांव-गांव मोहल्ले-2 में लोगों को संविधान के बारे में जानकारी देते हुए
और संविधान में कौन-कौन सी व्यवस्थाएं हैं जिससे हर एक मानव, समाज की रक्षा व सरकार चुनने और सरकार का महत्व के साथ मतदान कितना महत्वपूर्ण है, लोगों को जागरूक किया। जिससे प्रदेश में एक नई तस्वीर उभर कर आई है।
प्रेस वार्ता में राजेश सिद्धार्थ राष्ट्रीय अध्यक्ष संवैधानिक महासंघ ने कहा कि जब तक संविधान के बारे में देश के प्रत्येक नागरिक को जानकारी नहीं होगी तब तक शिक्षा अधिकार मान सम्मान स्वाभिमान सुरक्षित नहीं हो सकता।
संविधान ही सबका अधिकार मान सम्मान है। भारतीय संविधान हमारा मुख्य ग्रंथ है अगर इसके साथ किसी प्रकार का भेदभाव छेड़छाड़ अनदेखा किया गया तो महासंघ किसी स्तर पर बर्दाश्त नहीं करेगा। प्रदेश ही नहीं देश स्तर पर हम आंदोलन
करेंगे और पूरे देश में रथ यात्रा निकालकर देश के प्रत्येक नागरिक को संविधान के बारे में जागरूक करेंगे।
उक्त अवसर पर गंगा प्रसाद संयोजक संवैधानिक महासंघ ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा संविधान को विवादित करने का षड्यंत्र किया जाता है,
जबकि भारतीय संविधान ही भारत का स्वाभिमान है अगर भारतीय संविधान के साथ छेड़छाड़ किया जाता है तो देश के साथ छेड़छाड़ और बिखराव की स्थिति पैदा करने का षड्यंत्र माना जाएगा।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर पदम् श्री एस एन कुरील ने गोष्टी को संबोधित करते हुए कहा कि शोषित पीड़ित, दलित, पिछड़ा एवं आदिवासी को संविधान में पूर्ण रूप से अधिकार पर्याप्त है लेकिन राजनीतिक पूर्वाग्रह, से ग्रसित होकर निचले पायदान पर जीवन यापन करने वालों के तरफ ध्यान न देना संविधान का बहुत बड़ा उल्लंघन है।
गोष्ठी एवं प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से संयोजक मंडल अर्जुन देव भारती, रेखा रानी, डा० आर०सी कमल, प्रदीप पासी, सोनम गौतम, राम ब्रिज रावत, अभय प्रताप सिंह त्यागी, प्रदीप यादव, बौद्धमती बिमला, हर्ष कुमार रसिक, पी॰ के॰ यादव,
नसीमुल्लाह खान, डा० सत्या दोहरे, राविद्र कुमार गौतम,फर्रा किदवई, अब्दुल रहमान, छत्रपाल मौर्य, अनिल प्रजापति, राजू सिंह पटेल, अमर सिंह चैहान, फकीरे लाल, आदि लोग मौजूद रहे।