पचास वर्ष से भी ज्यादा चली राजनीतिक अदावत पर लगा विराम, इकबाल महमूद ने इस बार नहीं की कुछ बगावत।
संभल। डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क की राजनीतिक विरासत संभालने वाले जियाउर्रहमान बर्क ने 50 वर्ष से भी ज्यादा चली राजनीतिक अदावत को भी विराम दे दिया है।
विधायक इकबाल महमूद और उनके बीच फिलहाल रिश्ते सामान्य बने हुए हैं। जियाउर्रहमान बर्क को जीत की बधाई देने के लिए विधायक बुधवार को उनके घर पहुंचे और एक साथ काफी समय भी बिताया। लोगों में चर्चा है
कि अब यह राजनीतिक अदावत आगे नहीं बढ़ेगी। जियाउर्रहमान बर्क ने अपने दादा की विरासत को संभाल लिया है। अब उनका ध्यान दिल्ली की सियासत पर रहेगा।
विधायक इकबाल महमूद और डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क की राजनीतिक अदावत जग जाहिर रही है। ऐसा कोई चुनाव नहीं हुआ है जिसमें एक दूसरे की मुखालफत न की हो। इस अदावत की जानकारी सपा हाईकमान को भी रहती थी।
कई बार सुलझाने के प्रयास किए लेकिन यह अदावत कम नहीं हुई। डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क का बीमारी के चलते निधन हुआ तो इकबाल महमूद उनके घर पहुंच गए और यहीं से रिश्तों में सुधार हो गया। लोगों का कहना है कि डॉ. बर्क खेमे का ऐसा पहला चुनाव हुआ है
जिसमें इकबाल महमूद ने बगावत नहीं की है।हालांकि जियाउर्रहमान बर्क का टिकट होने से पहले तक इकबाल महमूद अपने लिए टिकट मांग रहे थे लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जियाउर्रहमान बर्क को प्रत्याशी बनाया।