सम्भल में रहे प्रभारी के खिलाफ शामली गढ़ी पुख्ता थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है
आय से अधिक संपत्ति का मामला,
रिश्वत लेते रंगे हाथों क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर गिरफ्तार किया था 12 दिसंबर 2019 में चंदौसी में गिरफ्तार इस्पेक्टर सहदेव सिंह को ले जाती क्राइम ब्रांट की टीम फोटो।
सम्भल में इंस्पेक्टर रहे सहदेव सिंह शामली जनपद के गांव मलेंडी के निवासी हैं जो काफी समय से पुलिस में सेवाएं दे रहे थे। एसओजी इंस्पेक्टर सहदेव को आरोपी को छोड़ने और पीड़ितों को दोषी ठहरने के आरोप के मामले में एंटी करप्शन टीम ने घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जांच-पड़ताल कर रही है।
सरकार के आदेशों पर एंटी करप्शन टीम ने पुलिस विभाग के भ्रष्ट अधिकारी पर कार्रवाई कर रही है। जिसमें इंस्पेक्टर सहदेव को गिरफ्तार कर जेल भेज गया था। संभल में इंस्पेक्टर रहे सहदेव सिंह शामली जनपद के गांव मलेंडी के निवासी हैं जो काफी समय से पुलिस में सेवाएं दे रहे थे। इंस्पेक्टर सहदेव को आरोपी को छोड़ने और पीड़ितों को दोषी ठहरने के आरोप के मामले में एंटी करप्शन टीम ने घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
आय से अधिक संपत्ति रखने का मुकदमा जांच पड़ताल के बाद कृष्ण अवतार की शिकायत पर आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में भी अब भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत आरोपी इंस्पेक्टर सहदेव सिंह के खिलाफ गढ़ी पुख्ता थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। सीओ थाना भवन ने बताया कि भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व इंस्पेक्टर सहदेव सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस जांच पड़ताल करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
पहले का पूरा मामला
चंदौसी थाना से एंटी करप्शन शाखा (भ्रष्टाचार निरोधक इकाई) मुरादाबाद ने बुधवार को जिले की क्राइम ब्रांच के प्रभारी इंस्पेक्टर सहदेव सिंह को एक हत्या की जांच में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर मुकदमे के वादी से चालीस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ चंदौसी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
बहजोई थाना क्षेत्र के अतरासी गांव में 14 सितंबर 2018 को अंकित सिंह यादव पुत्र मोरध्वज यादव की गला दबाकर हत्या करने के बाद शव को फंदे पर लटका दिया गया था लेकिन परिजनों ने इसकी पोल खोल दी थी। आरोप है कि शादी के चार महीने के बाद ही उसकी पत्नी शिवधारा ने अपने प्रेमी व मायके वालों के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी थी। इस मामले में शिवधारा, उसके पिता राजेंद्र, भाई रूम सिंह, विशंभर के खिलाफ बहजोई थाने में रिपोर्ट लिखाई गई थी। उसके प्रेमी नेमपाल सिंह निवासी अतरासी का नाम पुलिस ने अपनी जांच में खोला था।
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कुल पांच आरोपी बनाए गए थे। इसमें नेमपाल सिंह, राजेंद्र सिंह व रूम सिंह को तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था लेकिन शिव धारा, उसका भाई विशंभर अभी तक फरार है। मृतक अंकित के मुकदमे का वादी उसका तहेरा भाई मुनेश सिंह यादव पुत्र कालीचरन यादव कर रहा था। क्योंकि अंकित सिंह के माता-पिता का देहात तभी हो गया था, जब अंकित डेढ़ साल का था। उसके बाद उसे चाचा कालीचरन सिंह यादव ने ही पाला था।
यह मामला काफी चर्चित हो गया था। इसलिए इसकी जांच पुलिस अधीक्षक ने क्राइम ब्रांच को सौंप दी थी। क्राइम ब्रांच प्रभारी इंस्पेक्टर सहदेव सिंह इसकी जांच कर रहे थे। मुनेश सिंह यादव ने बताया कि दो महीने पहले सहदेव सिंह ने फोन कर उसे बताया कि दूसरी पार्टी अच्छे पैसे दे रही है, यदि वह भी एक लाख रुपये दे दे तो उसके फेवर की रिपोर्ट लगाऊंगा, अन्यथा उसका काम खत्म कर दूंगा, उल्टे मुनेश को जेल भी जाना पड़ सकता है,
क्योंकि मेरी कलम में बहुत ताकत है, कुछ भी कर सकता हूं। इस पर मुनेश ने एक लाख रुपये दे दिए। फरार आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी थे, लेकिन वह हाजिर नहीं हो रहे थे। इसलिए उनके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की जानी थी। जिसके लिए इंस्पेक्टर सहदेव सिंह ने मुनेश से चालीस हजार रुपये और मांगे।मुनेश ने अपने मित्र व भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष सरनवीर सिंह से मिलकर पूरी बात
बताई तो उन्होंने एंटी करप्शन शाखा से संपर्क करने की बात कही। एक दिन पहले ही मुरादाबाद जाकर एंटी करप्शन आफिस में जाकर मामले की जानकारी दी तो उन्होंने बीस हजार रुपये के केमिकल लगे नोट दिए। उप निरीक्षक अब्दुल रज्जाक की अगुवाई में एंटी करप्शन टीम बुधवार की सुबह ही बहजोई पहुंच गई।
मुनेश ने जब इंस्पेक्टर सहदेव सिंह को फोन किया कि आकर रुपये ले लो, तो वह तत्काल ही बाहर आकर उसकी गाड़ी में बैठ गए और रुपये लेकर ऊपर ही जेब में रख लिए। जैसे ही मनेश ने इशारा किया तो एंटी करप्शन टीम ने सहदेव सिंह को गिरफ्तार कर लिया। चंदौसी कोतवाली लाकर देर शाम तक उनसे पूछताछ कर कार्रवाई की गई। चंदौसी कोतवाली में उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
अपराधियों की तरह इंस्पेक्टर को पकड़कर लाई टीम
जब क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सहदेव सिंह को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा तो गाड़ी से उतरने में काफी आनाकानी की। आखिरकार, एंटी करप्शन टीम ने इंस्पेक्टर को अपराधियों की भांति खींचकर अपनी गाड़ी में डाल लिया।
आरोप है कि इंस्पेक्टर सहदेव सिंह मुनेश सिंह को बुधवार की सुबह से तीन-चार बार फोन करके रुपये लेकर आने को कह चुके थे। लगातार धमकी भी दे रहे थे कि वह कई दिनों से रुपये लेकर आने की बात कहकर आ नहीं रहा था। यदि आज रुपये लेकर नहीं आया तो उसे इसका अंजाम भुगतना होगा। यही कारण था कि मुनेश ने जैसे ही फोन किया,
तो इंस्पेक्टर बिना कुछ सोचे समझे ही अपने कार्यालय से बाहर निकलकर मुनेश की गाड़ी में आकर बैठ गए। एंटी करप्शन टीम ने हिदायत दे रखी थी कि जब इंस्पेक्टर रुपये ले ले तो वह बाहर थूककर एक बार खिड़की को बंद करके दोबारा बंद कर दें।
इशारा मिलते ही टीम ने इंस्पेक्टर को दबोच लिया। रुपये इंस्पेक्टर की ऊपर की जेब में रखे थे। हाथों में रुपये पकड़ने के कारण केमिकल्स लग गया था। इसके बाद इंस्पेक्टर ने धमकी देना शुरू कर दिया। गाड़ी में पैर फंसाकर नीचे नहीं आने की पूरी कोशिश की लेकिन टीम ने अपराधियों की भांति उन्हें बाहर खींच लिया और खींचते हुए अपनी गाड़ी में डाल लिया। वहां से तत्काल चंदौसी कोतवाली आ गए। यहां भी लोगों की नजर पड़ी तो इंस्पेक्टर सीट पर नहीं बल्कि सीट के नीचे बैठे हुए दिखे।
गणेश मेला कोतवाली के प्रभारी भी रहे सहदेव सिंह
इंस्पेक्टर सहदेव सिंह को इसी साल बनियाठेर, कुढ़ फतेहगढ़ के प्रभारी निरीक्षक रहने के साथ-साथ पिछले दिनों मेला श्रीगणेश चौथ की सुरक्षा की भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह कई महीनों तक बनियाठेर तो उसके बाद कुढ़ फतेहगढ़ के भी प्रभारी निरीक्षक बनाए गए। भ्रष्टाचार के आरोप कई बार लगे लेकिन कोई लिखित शिकायत नहीं की गई। लेकिन कुढ़ फतेहगढ़ से भी शिकायतों के बाद ही हटाकर उन्हें क्राइम ब्रांच का प्रभारी बना दिया गया था।