पंजीकरण नहीं, फिर बोर्ड पर कैसे लिखा नाम, अब डॉक्टर देंगे जवाब
बदायूं उझानी प्रसव के लिए भर्ती गर्भवती महिला की मौत के मामले में बिना पंजीकरण संचालित आशा नर्सिंग होम को सील किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। अब, डॉक्टरों से भी पूछा जाएगा कि जब नर्सिंग का पंजीकरण नहीं है तो वह डॉक्टरों के पैनल में कैसे शामिल हो गए।
एसीएमओ डॉ. मोहन झा, पवन जयसी और चिकित्साधीक्षक राजकुमार गंगवार ने बुधवार शाम आशा नर्सिंग होम सील कर दिया था। एसीएमओ ने बताया कि संचालक को पंजीकरण होने तक नर्सिंग होम बंद रखने का नोटिस भी दिया गया था, लेकिन नर्सिंग होम में प्रसूताओं को भर्ती किया जाता रहा।
नर्सिंग होम को सील किए जाने की कार्रवाई के दौरान एसीएमओ ने पूरे परिसर की वीडियोग्राफी भी कराई थी, जिसमें नर्सिंग होम के बोर्ड पर डॉक्टरों के पैनल में जो नाम लिखे हैं, उनसे जवाब मांगा जा रहा है।
पैनल में शामिल डॉक्टरों के बारे में जानकारी करने की जिम्मेदारी चिकित्साधीक्षक राजकुमार गंगवार को सौंपी गई है।
चिकित्साधीक्षक गंगवार ने बताया कि नर्सिंग होम के बोर्ड पर जिन डॉक्टरों के नाम लिखे हैं, उन्हें नोटिस भेजा जाएगा। उनसे यह भी पूछा जाएगा कि नर्सिंग में वह बैठते हैं या नहीं। अगर नहीं तो उन्होंने चिकित्सकीय पैनल में अपना नाम लिखवाने की सहमति किस आधार पर दी है।
किराये के भवन में चल रहा था नर्सिंग होम, मालिक को भी नोटिस- बुधवार शाम सील आशा नर्सिंग होम को लेकर एसीएमओ समेत टीम में शामिल कई अहम जानकारी भी जुटाई है।
चिकित्साधीक्षक के मुताबिक नर्सिंग होम किराये के भवन में संचालित है। भवन स्वामी को भेजे नोटिस में कहा गया है कि वह अपने भवन में बिना अनुमति के नर्सिंग होम का संचालन नहीं होने दें। साथ ही उसे खाली कराने की व्यवस्था भी कराई जाए।