वक़्फ़ बोर्ड और वक़्फ़ वोट में बदलाव करें मुसलमान फरहत अली खान
रामपुर। अखिल भारतीय मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फरहत अली खान ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र सरकार द्वारा वक़्फ़ अधिनियमों में जो परिवर्तन किया है कहा वह स्वागत योग्य है ।
मुसलमान मानते थे कि वक़्फ़ बोर्ड और सरकार एक ही बात होती है
उन्हें यह नहीं पता था कि वक्फ बोर्ड और सरकार अलग अलग है ।
जब इस पर गहनता से चर्चा हुई तब मुस्लिम समाज को इसका ज्ञान हुआ
यह बात बिल्कुल सही और सच है कि वक़्फ़ संपत्तिया जो मज़ार ,मस्जिद, मदरसों और गरीब लोगों के लिए थे उनका लाभ अमीर तरीन लोग उठा रहे थे ।
आज देखा गया कि वक़्फ़ संपत्तियों को जिस आधार पर महंगा से महंगा करके बेचा जा रहा है और उनको रजिस्ट्री के नाम पर मात्र पांच से पच्चीस रुपए का किराएदार बना दिया जाता है ।
जो पैसा आता है उसकी बंदर बांट वक़्फ़ बोर्ड से लेकर निचले अधिकारियों तक होती है ।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय और सरकार अगर यह कानून राज्यसभा में लागू कर पारित करती है ।
तो इससे और बेहतर क्या हो सकता है कि जिन संपत्तियों की सुरक्षा हम करते थे अब उनकी सुरक्षा सरकार करेगी ।
मैं माननीय सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र सरकार कि इस पहल का दिल से खैर मकदम करता हूं ।
साथ ही मुसलमानो से अपील करता हूं कि जहां वक़्फ़ बोर्ड में अमेंडमेंट हो रहा है वहां वह वक़्फ़ वोट में भी बदलाव करें ।
क्योंकि कुछ राजनीतिक दल और व्यक्ति हमें भटका भड़का बहका कर सड़कों पर लाकर खड़ा कर देते हैं और फिर किसी काम नहीं आते सब झेल हमें खुद ही झेलना पड़ती है।
अब वह वक्त आ गया है कि हम अपने वक़्फ़ वोट को भी वक्त वोट बनाएं और कानून सरकार का विरोध ना करते हुए सोच समझकर समर्थनऔर फैसला करें।