बरेली : आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने निमेसुलाइड दवा पर शोध किया था। इसमें पाया कि यह पशु-पक्षियों के लिए बेहद खतरनाक है। संस्थान की ओर से सरकार से इस पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई थी।पशुओं के लिए दर्द निवारक के तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली निमेसुलाइड दवा के उत्पादन,
बिक्री और वितरण को केंद्र सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर के वैज्ञानिकों ने शोध के बाद पाया कि यह पशु-पक्षियों के लिए बेहद खतरनाक है। इसलिए सरकार से इस पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी।
आईवीआरआई वन्य प्राणी विभाग के प्रभारी प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत पावड़े के मुताबिक कोरोना महामारी के दौरान गुजरात में एक गाय के शव पर चार गिद्ध मृत मिले थे। पक्षियों के संरक्षण के लिए कार्य कर रही संस्था साइकॉन के वैज्ञानिक डॉ. मुरलीधरन ने इस पर शोध किया।
उन्होंने मृत गाय के मांस और गिद्धों द्वारा खाए गए मांस की जांच की तो उसमें निमेसुलाइड पाई गई। दावा किया कि गाय को निमेसुलाइड दवा दी गई थी। मरने के बाद उसके शव को फेंक दिया गया, जिसे गिद्धों ने खाया और उनकी मौत हो गई।इसकी पुष्टि के लिए भारतीय मूल के साउथ अफ्रीकन वैज्ञानिक विनी नायडू ने भी शोध किया।
इसमें पता चला कि गायों को निमेसुलाइड की डोज देने से ही उनकी तबीयत बिगड़ी और मौत हुई। वर्ष 2021-2022 में दावों की पड़ताल का जिम्मा केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने आईवीआरआई इज्जतनगर को सौंपा।