नैशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड से नवाजे गए हिलाल बदायूँनी

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नैशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड से नवाजे गए हिलाल बदायूँनी

Sunday, February 9, 2025 | February 09, 2025 Last Updated 2025-02-09T14:34:30Z
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नैशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड से नवाजे गए हिलाल बदायूँनी

देवनागिरी लिपि में प्रकशित पुस्तक हुई चयनित , भारत विभूषण का मिला खिताब , नैशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम , प्रदेश का बढ़ाया मान,

बदायूँ । आर्टिस्ट्स वेलफेयर के अध्यक्ष मशहूर शायर व संचालक डॉ हिलाल बदायूँनी को साहित्यिक पुस्तक गुफ़्तगू चाँद से लिखने के लिए नैशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड-2024 से नवाजा गया है। डॉ हिलाल बदायूँनी की ये पुस्तक वर्ष 2024 में अंजुमन प्रकाशन व रेडग्रैब इंदौर के संयोजन से प्रकाशित हुई थी। ये पुस्तक अमेज़न पर उपलब्ध पुस्तकों की श्रेष्ठ श्रेणियों में शामिल है ।


नैशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स प्रत्येक वर्ष प्रकाशित चुनिंदा पुस्तकों के लिए पुरस्कार प्रदान करता है जिसमें फिक्शन , नॉनफिक्शन , जीवनी , आत्मकथा , कविता और आलोचना पर आधारित किताबों को शामिल किया जाता है । नैशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अंतर्गत प्रदान किये जाने वाले भारत विभूषण पुरस्कार राष्ट्रीय अभिलेख समिति द्वारा की गई सिफारिशों पर प्रदान किए जाते हैं ।

 जिसका चयन साहित्यकार की पिछली उपलब्धियों व प्रकशित कृति के आधार पर किया जाता है। यह पुरुस्कार नेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है, जिसका प्रबंधन इनसाइटएक्स मीडिया एलएलपी के साथ कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत किया जाता है।
डॉ हिलाल बदायूँनी की देवनागरी लिपि में प्रकशित पुस्तक गुफ्तगु चाँद से की भाषा शैली क्लिष्ट उर्दू या हिंदी नहीं बल्कि हमारे देश की वो आम भाषा है जो हर जनमानस के हृदय को स्पर्श करती है ।

 इसके साथ किताब में जितनी भी कविताएं हैं उनमें एक शब्द भी राजनीतिक नहीं बल्कि साहित्य की जो समरसता है उसी से ओतप्रोत है । किताब में उन सभी सामाजिक मुद्दों एवम भारत की संस्कृति को कविता बनाकर शामिल किया गया है जो हमारे देश की अलौकिक पहचान है 

जो भारतवासियों के जीवन का मर्म है । किताब में एक हिंदुस्तानी नारी के व्यक्तिव , उसके त्याग तपस्या से लेकर उसके निश्छल प्रेम को ही नहीं दर्शाया गया बल्कि कविताओं में एक प्रेमिका के साथ साथ माँ बहन बेटी मज़दूर बच्चे उन सभी की वास्तविक जीवन शैली पर प्रकाश डाला गया है । हमारे देश मे जहाँ विविधता में भी एकरूपता दिखाई देती है , जहां अनेकता में एकता दिखाई देती है ,

 जहां हर सुगंध के हर रंग के फूल इसके उपवन को सुशोभित करते हैं जहां, विभिन्न नदियां मेल मुहब्बत की मिसाल देते हुए संगम बनाती हैं जहां हर धर्म के त्योहार हर्ष उल्लास के साथ मनाये जातें हैं वहीं किताब में होली का भी चित्रण है दीवाली का भी चित्रण है ईद का भी चित्रण है , राष्ट्रीय पर्वों की अलौकिकता को भी संदर्भ बनाकर सारगर्भित किया गया है 

 इन तमाम पहलुओं का अवलोकन करते हुए नैशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की चयन प्रक्रिया में वर्ष 2024 के नैशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए डॉ हिलाल बदायूँनी की पुस्तक का चयन किया गया है । जिसमे उनको नैशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अंतर्गत भारत विभूषण ऑफिशियल सर्टिफिकेट बॉक्स , मैडल , बैज व मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया । हिलाल बदायूँनी की इस उपलब्धि पर उनके शुभचिंतकों, 

जनपदवासियों व साहित्यकारों की बधाईयों का तांता लगा हुआ है । गौरतलब है कि हिलाल बदायूँनी की पुस्तक गुफ़्तगू चाँद से के अलावा उर्दू में एक अन्य पुस्तक ताबानी भी प्रकाशित हो चुकी है जिसका विमोचन दुबई में किया गया था । हिलाल बदायूँनी को उनकी उपलब्धियों के लिए इससे पूर्व भी कई प्रादेशिक व राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं ।
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