माता-पिता बच्चों को संस्कार नहीं दे रहे : आचार्य संजीव रूप
बिल्सी ::तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया ! आर्य समाज के अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने यज्ञ कराते हुए कहा “विवाह गुण कर्म स्वभाव मिलाकर ही होना चाहिए ! केवल जाति और कुल देख करके किए जाने वाले विवाह समाज को कमजोर करते हैं !
मजबूत राष्ट्र का मुख्य आधार मजबूत समाज होता है और मजबूत समाज का आधार संस्कारी व स्वस्थ युवा शक्ति होती है , स्वस्थ युवा शक्ति तभी होती है जब गृहस्थ उत्तम हो , गृहस्थ उत्तम तब होता है जब पति-पत्नी एक दूसरे के प्रति समर्पित हों तथा गुण कर्म स्वभाव से एक हों !
मानव शर्मा की आत्महत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब माता-पिता बच्चों को संस्कार नहीं दे रहे हैं, इसी कारण व्यभिचार को अब फैशन मान लिया गया है आज के दौर में ब्रह्मचर्य का कोई मायने नहीं रह गया है ! वैदिक विदुषी कुमारी तृप्ति शास्त्री ने कहा “गुरुकुल प्रणाली ही समाज को संस्कारी बना सकती है,
क्योंकि गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चे ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले तथा अपनी सांस्कृतिक मर्यादा को पालने वाले होते हैं ! कार्यक्रम में विचित्रपाल सिंह मास्टर साहब सिंह, श्रीमती भावना आर्य,सक्षम शर्मा,कुमारी अंशिका, कुमारी वंशिका,नीरेश आर्य, राकेश आर्यआदि मौजूद रहे।