छत्रपति शिवाजी महाराज हिंदू सम्मेलन संपन्न
सनातन संस्कृति विश्व की श्रेष्ठ संस्कृति - मेधानंद जी महाराज
(बदायूँ) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में संपूर्ण देश में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। इस श्रृंखला में सर्वप्रथम संचलन कार्यक्रम, इसके पश्चात गृह संपर्क अभियान और अब हिंदू सम्मेलन के रूप में कार्यक्रम चल रहे हैं।
इस निमित्त आज शिव देवी सरस्वती शिशु/विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के मैदान में छत्रपति शिवाजी महाराज हिंदू सम्मेलन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के अध्यक्ष मदन लाल राजपूत, उपाध्यक्ष अयोध्या प्रसाद शर्मा, मुख्य वक्ता मयंक राज जी, विभाग समन्वयक (आरएसएस) सीमा रानी,
मुख्य अतिथि पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष स्वामी मेधानंद सरस्वती महाराज, जिला प्रचारक भरत लाल , नगर प्रचारक तुलसीदास विभाग कार्यवाह जगजीवन राम विभाग संपर्क प्रमुख मनीष सिंघल उपस्थित रहे।
इस अवसर पर शिव देवी सरस्वती शिशु मन्दिर की बहिनों ने वन्दना व स्वागत गीत तथा शिव देवी सरस्वती विद्या मंदिर की बहिनों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी मेधानंद जी महाराज ने अपना उद्बोधन गायत्री मंत्र के साथ प्रारंभ किया। "कुर्सियां भ्रष्ट हो तो वतन क्या करें, चंद्रमा आग उगले तो गगन क्या करें"
गीत के माध्यम से उपस्थित जन समुदाय में नई ऊर्जा का संचार किया। स्वामी जी ने उपस्थित समाज से आह्वान किया कि वे सब अपने घरों में दैनिक गीता और रामचरितमानस के नित्य पाठक बने, जिससे भारतीय संस्कृति, संस्कार और सनातन सुरक्षित रह सके ममता शर्मा ने "
जिनकी कुर्बानी वतन की, आरती से कम नहीं" गीत के माध्यम से शहीदों को स्मरण किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मयंक राज जी ने कहा कि देश के लिए 100 वर्ष की संघ की यात्रा में संघ ने समाज में पांच परिवर्तन का संकल्प लिया है, जिस पर संघ कार्य चल रहा है
। कार्यक्रम के संयोजक वेद रत्न शर्मा ने कार्यक्रम में पधारे हुए समस्त अतिथि बंधुओं का आभार व्यक्त किया। धर्मा ट्रस्ट के संचालक राणा प्रताप जी के द्वारा सभी उपस्थित बंधुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई।