बदायूँ : 09 अप्रैल। उत्तर प्रदेश के विकास की धुरी मानी जाने वाली विद्युत आपूर्ति के क्षेत्र में राज्य ने एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। प्रदेश सरकार के कुशल एवं दूरदर्शी विजन के फलस्वरूप राज्य की ऊर्जा उत्पादन क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए घाटमपुर तापीय विद्युत परियोजना की तीसरी इकाई (यूनिट-3) का सफलतापूर्वक ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन पूर्ण कर लिया गया है।
660 मेगावाट की इस विशाल क्षमता वाली इकाई का 765 केवी ग्रिड से जुड़ना न केवल तकनीकी उत्कृष्टता का प्रमाण है, बल्कि यह प्रदेश की निरंतर बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में राज्य सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम है
। नेवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड द्वारा संचालित यह परियोजना, जो एनएलसी इंडिया लिमिटेड (51 प्रतिशत) एवं उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (49 प्रतिशत) का संयुक्त उपक्रम है, अब अपने पूर्ण वाणिज्यिक संचालन की दिशा में सफलतापूर्वक अग्रसर है।
प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति के लिए निर्बाध बिजली की उपलब्धता एक अनिवार्य शर्त है।
इस तीसरी इकाई के जुड़ने से राज्य की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता बढ़कर लगभग 13,388 मेगावाट तक पहुँचने की संभावना है, जो उत्तर प्रदेश की बढ़ती ऊर्जा सामर्थ्य को दर्शाता है। परियोजना के पूर्ण रूप से संचालित होने के पश्चात प्रतिदिन लगभग 47.52 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाएगा, जिससे प्रदेश के आम नागरिकों, किसानों और उद्यमियों को बेहतर और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। उल्लेखनीय है कि यूनिट-1
एवं यूनिट-2 पहले ही क्रमशः दिसंबर 2024 और दिसंबर 2025 से सफलतापूर्वक संचालन में हैं, जो सरकार की समयबद्ध कार्यप्रणाली का परिचायक है। भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा निर्धारित आवंटन के अनुसार, इस परियोजना से उत्पादित लगभग 93.11 प्रतिशत बिजली उत्तर प्रदेश को प्राप्त होगी, जो राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में स्वावलंबी बनाने में मुख्य भूमिका निभाएगी। इसके साथ ही, भविष्य में निर्बाध एवं सतत विद्युत उत्पादन सुनिश्चित करने हेतु झारखंड स्थित पचवारा साउथ कोल ब्लॉक का विकास भी तीव्र गति से किया जा रहा है।
आधुनिक उत्तर प्रदेश की यह परियोजना केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरणीय मानकों पर भी पूरी तरह खरी उतरती है। अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित इस संयंत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिए एफजीडी (फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन) एवं एससीआर (सेलेक्टिव कैटालिस्ट रिडक्शन) जैसी उन्नत प्रणालियों का उपयोग किया गया है।
श्जीरो लिक्विड डिस्चार्जश् की व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता अक्षुण्ण रहे। ऊर्जा क्षेत्र में हासिल यह ऐतिहासिक उपलब्धि उत्तर प्रदेश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है। राज्य सरकार उपभोक्ताओं को विश्वसनीय और
गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यह उल्लेखनीय प्रगति न केवल ऊर्जा क्षेत्र में प्रदेश की बढ़ती साख को दर्शाती है, बल्कि बड़े पैमाने पर निवेश को आकर्षित करने और समग्र आर्थिक वृद्धि को नई गति प्रदान करने वाली है। घाटमपुर की यह सफलता उत्तर प्रदेश के ऊर्जावान और उज्ज्वल भविष्य का एक सशक्त जयघोष है।
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