पखवाड़ा और नेशनल प्रोग्राम फॉर क्लाइमेट चेंज एंड ह्यूमन हेल्थ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
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संवाददाता नेत्रपाल सिंह
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बहजोई महाविद्यालय बहजोई में हिंदी पखवाड़ा और नेशनल प्रोग्राम फॉर क्लाइमेट चेंज एंड ह्यूमन हेल्थ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव नीरज कुमार वार्ष्णेय "गोपी ऑयल मिल" महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. वीरेंद्र कुमार गुप्ता तथा राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गीता और हिंदी के सहायक आचार्य डॉ. बलवीर सिंह आदि ने मां सरस्वती के समक्ष द्वीप प्रज्ज्वलन और वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गयी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यालय अधीक्षक भगवान सिंह चौहान ने हिंदी की सरसता और रस के लिए अपने विचार प्रकट किए। इसी क्रम में बीकॉम प्रथम सेमेस्टर की छात्रा चंचल शर्मा ने पंक्तियों "हिन्दी हमारी आन है, हिंदी हमारी शान है" के माध्यम से अपने विचार प्रकट किए। प्रज्ञा भारद्वाज ने भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध पंक्तियों "निज भाषा उन्नत अहै, सब उन्नत को मूल" के माध्यम से अपने विचार प्रकट किए। इसी क्रम में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षाशास्त्र के सहायक आचार्य यशपाल सिंह ने बताया कि हिंदी मन से मन को जोड़ने की भाषा है। उन्होंने निम्न पंक्तियों "अपनी भाषा बोलते, आती जिसको लाज। बन सकता वह देश कब, दुनिया का सरताज।।" के माध्यम से अपने विचार प्रकट किए। इसी के साथ बीकॉम प्रथम सेमेस्टर की छात्रा ईशा वार्ष्णेय ने कहां की आज हिंदी सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है, 14 सितंबर, 1949 में हमारे संविधान सभा ने हिंदी को राजकीय भाषा के रूप में अपनाया तभी से वर्ष 1953 से हिंदी दिवस के रूप में अपनाया जाता हूं। इसी क्रम में हिंदी के सहायक आचार्य डॉ. बलवीर सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि हिंदी विश्व की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक हैं आज हिंदी भारत के साथ दुनिया के कई देशों में बोली जाती है और आज यह दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। अंत में उन्होंने निम्न पंक्तियों "जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं। वह ह्रदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।।" के माध्यम से अपनी बात समाप्त की। बीए के छात्र मुमताज अब्बास और छात्रा शीतल ने हिंदी के विषय में अपने विचार प्रकट किए। इसी क्रम में अंग्रेजी के सहायक आचार्य सत्येंद्र कुमार ने बताया कि हमारे भारत में विभिन्न संस्थाएं 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाते हैं लेकिन आजादी के इतने वर्षों बाद भी हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिला बल्कि यह एक राजभाषा बनकर रह गई। मैं कहना चाहूंगा कि हिंदी को सही सम्मान दिलाने के लिए इसको राष्ट्रभाषा घोषित किया जाएं तथा उचित सम्मान दिलाया जाएं। इसी के साथ राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी डॉ गीता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि आज हिंदी विश्व स्तर की भाषा बन चुकी है आज आप विदेशी अनुसंधानों आदि को हिंदी में पढ़ सकते है। इसी के साथ उन्होंने निम्न पंक्तियों "जहां सुमति तह संपत नाना, जहां कुमतु तह विपत्ति निधाना" के माध्यम से विद्यार्थियों को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं दीं।