दीपावली पर्व के लिए गौशालाओं में बनेंगे गोबर के दीये और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, आत्मनिर्भर बनेंगी गौशालाएं...
संवाददाता राजेश कुमार गुप्ता ब्यूरो चीफ बदायूं
प्रदेश की सभी गौशालाओं में गौजन्य उत्पादों को प्रोत्साहित किया जाये...
दीपावली के पावन पर्व पर पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार सृजन और गौशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी जनपदों की गौशालाओं में गोबर से बने दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां तथा अन्य पर्यावरण अनुकूल पूजन सामग्री तैयार कराने के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्य किये जाने के निर्देश दिए हैं। गौजन्य पदार्थों का सदुपयोग कर उपयोगी उत्पाद तैयार करने से गौशालाओं की आय बढ़ाने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान की जा सकती है। दीपावली के अवसर पर गोबर से बने दीयों और पूजन सामग्री को प्रोत्साहित करने से प्राकृतिक संसाधनों के सदुपयोग तथा पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों के प्रति जनजागरूकता बढ़ेगी। इससे गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायता मिलेगी।
लखनऊ: विधान भवन स्थित कक्ष संख्या 80 में गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाये जाने के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। गौशालाओं में गोबर आधारित उत्पादों के निर्माण में स्थानीय कारीगरों, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और महिला स्वयं सहायता समूह को भी बढ़ावा मिलेगा। इन उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक डिजाइन और बाजार में उपलब्धता पर ध्यान देकर इन्हें आमजन तक पहुंचाने के प्रयास किए जाये। स्थानीय स्तर पर आयोजित मेलों में विशेष स्टाल लगाये जाये। गोबर एवं मिट्टी से बने दीये और मूर्तियां भारतीय परंपरा के साथ प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का भी संदेश देते हैं। स्थानीय स्तर पर गोबर से निर्मित उत्पादों को अपनाने से ग्रामीण उत्पादकों को प्रोत्साहन मिलेगा और गोबर के उत्पादों का मूल्यवर्धन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं स्वरोजगार को बल मिलेगा। गोबर से जैविक खाद तथा अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करके भी गौशालाओं की आर्थिक गतिविधियों को विस्तार दिया जा सकता है। गौशालाओं की आत्मनिर्भरता से गोवंश के संरक्षण, बेहतर देखभाल और व्यवस्थाओं को मजबूत करने में भी सहायता मिल सकती है। दीपावली के अवसर पर गोबर आधारित उत्पादों के निर्माण और उपयोग को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी उत्पादों के प्रोत्साहन तथा ग्रामीण आजीविका के उद्देश्यों को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।
प्रदेश के सभी जनपदों की गौशालाओं में गोबर एवं मिट्टी से निर्मित दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों तथा अन्य उपयोगी उत्पादों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। गौशालाओं में उपलब्ध गोबर का बेहतर उपयोग करने, स्थानीय कारीगरों, महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूहों को इस कार्य से जोड़ने तथा तैयार उत्पादों के प्रचार-प्रसार और विपणन की संभावनाओं पर विशेष ध्यान देने को कहा, ताकि इस पहल से गौशालाओं की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकें।