यज्ञ मंडप परिक्रमा करने से होती है मनोवांछित फल की प्राप्ति शिवाचार्य
श्री सिद्ध बाबा धाम के परिसर में आयोजित सप्त दिवसीय लक्ष्मी-नारायण महायज्ञ में लोगों ने की पूजा-अर्चना
इस्लामनगर क्षेत्र के ग्राम कोठा स्थित श्री सिद्ध बाबा धाम के परिसर में आयोजित सप्त दिवसीय लक्ष्मी-नारायण महायज्ञ में मंडप परिक्रमा करने के लिए रोजाना हजारों श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं।
धार्मिक आस्था के अनुरूप छोटे-छोटे बच्चे और महिला-पुरुष सुबह से ही परिक्रमा के लिए यज्ञ स्थल पर जुटने लग जाते हैं। क्षेत्र में महायज्ञ होने से इस तरह का धार्मिक वातावरण बना हुआ है
यज्ञअधिष्ठाता श्री श्री 1008 अजय दास जी महाराज यज्ञाचार्य युवराज शिवाचार्य जी महाराज आचार्य कैलाश उपाध्याय आचार्य विकास दीक्षित ने कहा है
कि महायज्ञ का आयोजन होने से सर्व देवी देवता एवं सारे तीर्थ विराजमान होते हैं। शास्त्रोक्त इस आधार से यज्ञ मंडप परिक्रमा करने से मनोवांछित फल मिलता है। हिंदू शास्त्र में मंडप परिक्रमा के संबंध में वर्णित है कि यम यम चिंतयते कामम,
तम तम प्राप्नोति निश्चितम। यानी जो व्यक्ति जिस कामना लेकर परिक्रमा करते हैं वे वैसा ही प्राप्त करते हैं। आचार्य ने बताया कि शुद्ध चित्त और लक्ष्मी-नारायण के प्रति समर्पण होकर मंडप परिक्रमा करना चाहिए।
मन नही मन अगर ऊँ नमः भगवते बासुदेवाय का जाप करते हुए परिक्रमा किया जाता है तो एकाग्रता कायम रहता है और अधिक फलदायी साबित होता है। भगवान विष्णु के लिए
कम से कम चार वार तथा अत्यधिक अपनी क्षमता के अनुसार 21,51 या 108 वार तक परिक्रमा करना लाभकारी सिद्ध होता है। उन्होंने कहा कि वैदिक काल से ही देवी देवता का परिक्रमा करने का सिद्धांत शुरू हुआ है।
भगवान गणेश ने भी परिक्रमा किया है तथा सभी महायज्ञ में परिक्रमा करने का विधान रहा है। यही कारण है कि महायज्ञ संचालित मंडप सिर्फ एक बार परिक्रमा करने से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।