इन्द्र के कोप से त्रस्त एटा महोत्सव

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इन्द्र के कोप से त्रस्त एटा महोत्सव

Monday, February 5, 2024 | February 05, 2024 Last Updated 2024-02-05T08:46:58Z
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इन्द्र के कोप से त्रस्त एटा महोत्सव

जिला कृषि एवं औद्योगिक विकास प्रदर्शनी चढ़ी अनमित्ता की Exclusive भेंट

ऊंची दुकान फीके पकवान.... पहले से ग्राहकों के लिए तरस रहे दुकानदारों पर बारिश की मार फ्लाॅप हुई जिला कृषि एवं औद्योगिक विकास प्रदर्शनी

एटा। एटा महोत्सव एक करोड़ प्चतर लाख रुपए जीएसटी सहित उठने के बाद वेहाल है, जहां लूटम लाट मची है,एटा महोत्सव की Exclusive रिपोर्ट में पता चला साहब खेल तमाशों में खेल करके चले गए और दोना पत्तल फेंकने के नाम पर नये साहब लगे है, अब देखने की बात है,


१२ फरवरी २०२४ का समय पूरा होने को है, तो जिला महोत्सव के लेखा जोखा की पत्तल चाटने वाले निरंकुश वेलगाम भष्ट्र पर प्राकृतिक मार है,

जनपद में प्रत्येक वर्ष लगने वाली नुमाइश को भव्य और बड़े स्तर पर पहचान दिलाने में निवर्तमान जिलाधिकारी अमित किशोर का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके प्रयासों के चलते ही इस नुमाइश को जनपद की जनता ने जिला कृषि एवं औद्योगिक विकास प्रदर्शनी के नाम से जाना।

निवर्तमान जिलाधिकारी अमित किशोर के कार्यकाल में लगी जिला कृषि एवं औद्योगिक विकास प्रदर्शनी में बिछाई गईं हैं पक्की सड़कें और शानदार व्यवस्थाओं के चलते पूरे जनपद में निवर्तमान जिलाधिकारी अमित किशोर ने वाहवाही बटोरी थी।

लेकिन इस वर्ष लगी जिला कृषि एवं औद्योगिक विकास प्रदर्शनी में न पक्की सड़कें हैं और न ही उस तरह की व्यवस्थाएं, प्रदर्शनी को देखकर ऐसा कह सकते हैं प्रशासन ने ठेका उठाने के बाद सिर्फ अपनी भूमिका निभाने के लिए सिर्फ खानापूर्ति तक ही तक सीमित रखा है।

प्रशासन ने महंगा ठेका उठाकर भले ही राजस्व को फायदा पहुंचाया हो लेकिन प्रदर्शनी में दुकानों की भरपाई नहीं कर सका, एक तरफ कम दुकानें आईं और उसमें भी महंगी ज़मीन मिलने पर दुकानदारों द्वारा सामानों को भी महंगे दामों पर बेचा जा रहा है जिसके चलते आम जनमानस ने भी नुमाइश से मुंह मोड़ लिया है जिसके चलते प्रदर्शनी में लगी दुकानों पर भीड़ न के बराबर दिखाई दे रही है।

बता दें बारिश के कारण प्रदर्शनी में कीचड़ और गंदगी की भरमार है जिसके चलते भीड़ ना के बराबर नुमाइश का रुख कर रही है और इस फ्लाॅप हो चुकी प्रदर्शनी की इज्जत सिर्फ पंडाल बचा रहा है जिसमें कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं


 अगर इस पंडाल में कार्यक्रम न हो तो जो भीड़ वहां दिखाई दे रही है वो भी ना दिखाई दे और प्रदर्शनी का हाल गांव-कस्बों में लगने वाले मेलों से भी ज्यादा बदहाल हो।पंडाल भी क्या करें नीचे से पानी का रेला अंदर घुसने लगा है। दो दिन पहले की बरसात में डलवाई गई मिट्टी पूरी तरह से दलदल का रूप लेती जा रही है। बेचारे दुकानदार
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