हिंसक आंदोलन को भारतीय किसान संघ का समर्थन नहीं : शंखधार
मिलक। भारतीय किसान संघ रामपुर के जिला अध्यक्ष आदेश शंखधार ने कहा है कि भारतीय किसान संघ किसानों की उपज का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रहा है।
देश की सरकारों के साथ संवाद स्थापित कर किसानों के पक्ष को मजबूती के साथ रखता आया है। जहां संवाद से रास्ता नहीं निकलता है तो आंदोलन भी करता है। आदेश शंखधार ने कहा कि 19 दिसम्बर 2022 को दिल्ली के रामलीला मैदान में किसान गर्जना रैली के रूप में एक लाख किसानों का
अनुशासित शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन इसका एक बड़ा उदाहरण है। पूरे देश भर से किसान दिल्ली में आए और शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार से कही और बिना किसी को परेशान किए ही अपने घरों को वापस लौट गए।
आदेश शंखधार ने कहा कि जब राजनैतिक मंशा के साथ किसानों के कंधे का प्रयोग कुछ लोग अपने राजनैतिक हित साधने के किए करते हैं तो अत्यंत पीड़ा होती है। भारतीय किसान संघ का मानना है
कि जब किसान के नाम पर राजनैतिक आंदोलन चलता है तो इसका नुकसान सिर्फ और सिर्फ किसानों को ही होता है। विगत वर्षों में मंदसौर व दिल्ली में हुए आंदोलन इस बात के प्रमाण हैं कि कहीं छैः
तो कहीं यह आंकड़ा छै सौ तक भी पहुंचा है जहां पर किसानों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। उनके मुद्दे व मांगे जस की तस हैं। इसलिए भारतीय किसान संघ का आग्रह है कि किसानों के नाम पर राजनैतिक चुनावी पैंतरावाजी बंद होनी चाहिए। किसान हित में लड़ने वाले संगठन लगातार किसानों की समस्या के निवारण के लिए लड़ रहे हैं।
सरकार किसी की भी हो सामंजस्य के साथ किसानों की समस्याओं का समाधान निकाल भी रहे हैं। लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य किसान का हक है जो कि उसे मिलना ही चाहिए। आज बीज व बाजार किसानों की प्रमुख समस्या है मण्डी के अंदर हो या बाहर किसान के साथ बीज व बाजार में शोषण बंद होना ही चाहिए।
आगे कहा कि जब राजनैतिक मंशा से चुनाव के दौरान किसान के नाम पर आंदोलन होते हैं तो आंदोलन के दौरान होने वाली हिंसा, अराजक माहौल तथा राष्ट्र की संपत्ति का नुकसान होने से समाज में किसान के प्रति नकारात्मक भाव जन्म लेेता है। जिसका खमियाज़ा अपनी बेहतरी के लिए
संघर्षरत किसान को चुकाना पड़ता है। इसलिए भारतीय किसान संघ हिंसक आंदोलन का समर्थन नहीं करता है। हमारा आग्रह है कि जिन लोगों को अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा पूरी करनी हैं वो करें। लेकिन समाज में किसान के प्रति नकारात्मक भाव को पैदा न करें।
हम पुनः दोहराते हैं कि लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य किसान का हक है वह किसान को मिलना ही चाहिए। तथा हमारी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं कि लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य किसान का अधिकार है, कृषि आदानों पर जीएसटी समाप्त की जाए,