बाबा बागेश्वर बोले: मुरादाबाद का नाम हो माधव नगर, अयोध्या और काशी की तरह हरिहर मंदिर में भी पूजा हो।

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बाबा बागेश्वर बोले: मुरादाबाद का नाम हो माधव नगर, अयोध्या और काशी की तरह हरिहर मंदिर में भी पूजा हो।

Tuesday, March 19, 2024 | March 19, 2024 Last Updated 2024-03-19T11:23:27Z
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मुरादाबाद।

बाबा बागेश्वर बोले: मुरादाबाद का नाम हो माधव नगर, अयोध्या और काशी की तरह हरिहर मंदिर में भी पूजा हो।


मुरादाबाद में बाबा बागेश्वर का दिव्य दरबार का आयोजन हो रहा है। इस दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मुरादाबाद का नाम माधव नगर कर देना चाहिए। इसमें किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। 

मुरादाबाद में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 
कैंची धाम की तर्ज पर मुरादाबाद में बाबा नीब करौरी का धाम भी बना है। अब इसको मुरादाबाद कहना उचित नहीं है। मुरादाबाद को माधव नगर कर देना चाहिए। यह कहना है


श्री बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का। वह लोहिया एस्टेट में आयोजित हनुमंत कथा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि किसी को बुरा लग रहा है तो आई एम वैरी-वैरी नॉट सॉरी।

जिस क्षेत्र में सिद्धबली हनुमान मंदिर हो, हरिहर मंदिर हो, गढ़ गंगा हो, शीतला माता का मंदिर हो, ऐसे में मुरादाबाद कहने में इन मंदिरों की अवहेलना है।

उन्होंने कहा कि भारत में इतने नाम बदल गए। फैजाबाद अब अयोध्या हो गया है। इलाहाबाद प्रयागराज हो गया तो मुरादाबाद को माधव नगर कर देना चाहिए।

कौन सी बड़ी बात है। पर माधव नगर कहने से कई लोगों के पेट में अपच हो जाएगी। कई लोग कल ही न्यूज में दिखाएंगे कि बाबा ने दिया विवादित बयान, मुरादाबाद का नाम बदलने की मांग की।


 उन्होंने कहा कि लोगों को लगेगा कि यह उपद्रव करने आते हैं, लेकिन हम क्या बताएं, हमें हनुमान जी ने भेजा ही सच बोलने के लिए है। हमारा सौभाग्य है कि हम मुरादाबाद उर्फ माधव नगर आए हैं।
 
बुरा न मानना। सबकी अपनी-अपनी भावना होती है। हम बहुत स्पष्टवादी हैं। हम नफरत नहीं, प्रेम के आदी हैं और गर्व से कहते हैं कि हम हिंदुत्ववादी हैं।


हम किसी मजहब के विरोध में नहीं है। उनका सम्मान है, लेकिन हम अपने सनातन का सम्मान नहीं छोड़ेंगे। अपने सनातन का अपमान नहीं सहेंगे।
 
अयोध्या और काशी की तरह हरिहर मंदिर में भी हो पूजा
हनुमंत कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि आज का नजारा देखकर लग रहा है


कि हमें पिछले साल ही आ जाना चाहिए था। हमसे कोई कह रहा था कि यहां आना जरूरी है, क्योंकि यहां धर्म विरोधी बहुत हैं। अब उनकी ठठरी हम नहीं बांधेंगे तो कौन बांधेगा। यहां पर सिद्धबली हनुमान का धाम है।

 
यहां पावन धाम हरिहर मंदिर है। किसी कारण से पूजा बंद है। लोग कहते हैं कि अंदर से आवाज आती है। जब अयोध्या में राम विराजमान हो गए हैं। काशी में भोलेनाथ आ गए हैं तो अब हरिहर मंदिर में भी रुद्राभिषेक होना चाहिए।

 आरती होनी चाहिए। बता दें कि संभल के एक धर्मस्थल को प्राचीन हरिहर मंदिर कहा जाता है। हालांकि पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अपने कथन के दौरान संभल का नाम नहीं लिया।
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