सम्भल।
मिट्टी का घड़ा क्यों ,वाटर कूलर क्यों नही।
डॉ नीरज शर्मा की अनुभवी कलम से
आप सभी ने प्रायः देखा होगा कि अब से लगभग 20 साल पहले जब फ्रिज और वाटर कूलर का प्रचलन बहुत कम था
हर घर व प्रतिष्ठान में पीने के स्वच्छ जल हेतू मिट्टी का घड़ा जरूर मिलता था उस समय मिट्टी के वर्तन बनाने बाले कारीगरों की संख्या भी बहुतायत रहती थी धीरे धीरे मिट्टी के घड़े का पानी पीना लोगों ने बंद कर दिया
व फ्रिज का ठंडा पानी या वाटर कूलर का ठंडा पानी स्तेमाल करना शुरू कर दिया ।पहले पेट और लिवर से संबंधित बीमारियां न के बराबर होती थी क्योंकि
हम प्राकृतिक रूप से ठंडा हुआ पानी पीते थे मगर अब पेट व लिवर से संबंधित विमारियों से बहुत ज्यादा लोग ग्रसित हो रहे हैं क्योंकि हम अप्राकृतिक रूप से ठंडा किया( फ्रिज या वाटर कूलर) हुआ पानी पी रहे हैं।
आप सभी से निवेदन है कि अपने प्रतिष्ठान और अपने घर पर मिट्टी का घड़ा जरूर रखें व उसी का पानी खुद भी पियें और इतनी भीषण गर्मी में राहगीरों को भी पिलायें।
इस मुहिम में मैने अपना योगदान दिया आप सभी से भी उम्मीद ही नही पूर्ण विश्वास है कि आप भी मुहिम का हिस्सा बन भारतीय प्राचीन पद्धिति को अपनायें।