भागवत कथा में सुनाया सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष का प्रसंग
बिसौली-क्षेत्र के ग्राम शरह बरौलिया में सिद्व बाबा आश्रम पर सोई वाले महाराज स्व. पूज्यपाद श्रीविदेह नन्दनी शरण महाराज जी की स्मृति में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवे व अंतिम दिन कथावाचक मणिश्वर भारद्वाज ने सुदामा प्रसंग और परीक्षित मोक्ष की कथाएं सुनाई।
उन्होंने बताया सुदामा जी के पास कृष्ण नाम का धन था। संसार की दृष्टि में गरीब तो थे, लेकिन दरिद्र नहीं थे। अपने जीवन में किसी से कुछ मांगा नहीं। पत्नी सुशीला के बार-बार कहने पर सुदामा अपने मित्र कृष्ण से मिलने गए। भगवान के पास जाकर भी कुछ नहीं मांगा।
भगवान अपने स्तर से सब कुछ दे देते हैं। सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों के सामने दोस्ती की मिसाल पेश की और समाज में समानता का संदेश दिया। इसके उपरांत दत्तात्रेय जी के चौबीस गुरुओं के बारे में बताया।
कथा समापन के दौरान कथावाचक मनीश्वर भारद्वाज ने भक्तों को भागवत को अपने जीवन में उतारने की बात कही, जिससे सभी लोग धर्म की ओर अग्रसर हो। साथ ही भक्तों को बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है,
तो वहीं इसे करवाने वाले भी पुण्य के भागी होते है। कथा के आयोजक सिद्व बाबा आश्रम के महंत सोहन दास महाराज ने बताया कथा समापन के उपलक्ष्य में कल भंडारे का आयोजन किया गया हैं।
कथा के दौरान श्याम पाल पाठक,सत्यपाल शर्मा,सर्वेश पाठक "फौजी' वेदराम दिवाकर,सेवेंद्र दिवाकर,