अधिकतर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के अभ्यर्थी ही क्यों बनते हैं आईएएस

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अधिकतर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के अभ्यर्थी ही क्यों बनते हैं आईएएस

Wednesday, February 26, 2025 | February 26, 2025 Last Updated 2025-02-26T14:16:18Z
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अधिकतर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के अभ्यर्थी ही क्यों बनते हैं आईएएस

 सम्भल। आरटीआई अटैक ऑन करप्शन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के मंडल मुरादाबाद से मंडल उपाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि व्यवहारिक तौर पर देखने में आता है कि अधिकतर आईएएस अधिकारी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से ही क्यों होते हैं? जबकि आईएएस बनने के लिए इंजीनियरिंग सब्जेक्ट्स की कोई भी आवश्यकता नहीं होती 

आईएएस बनने के लिए आमतौर पर कलात्मक विषयों की आवश्यकता होती है उदाहरण के तौर पर इतिहास, भूगोल, राजनीतिक विज्ञान, इत्यादि मगर फिर भी कलात्मक विषयों के विद्यार्थी आईएएस  कम मात्रा में ही बन पाते हैं। अधिकतर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के अभ्यर्थी ही  यूपीएससी की परीक्षा यानी आईएएस को क्वालीफाई करते हैं। आखिर इसके पीछे का क्या राज है? क्या लॉजिक है

इसका जवाब यह है कि माइंड की शार्पनेस। क्योंकि इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से स्नातक किए हुए स्टूडेंट विज्ञान वर्ग से होते हैं और वह कठिन विषयों को पढ़ते हैं जिसके कारण उनका दिमाग काफी शार्प हो जाता है इसलिए वो चीजों को बहुत जल्दी कैच करते है। इसी कारण इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के स्टूडेंट जल्द ही यूपीएससी का सिलेबस आसानी से समझ लेते हैं। कलावर्ग के विषयों जैसे इतिहास,भूगोल राजनीति विज्ञान विषयों से ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट किए हुए अभ्यर्थी कम मात्रा में ही सफल हो पाते हैं 

जबकि यूपीएससी का सिलेबस अधिकतर कला वर्ग के विषय पर ही आधारित रहता है मगर फिर भी सफलता कला वर्ग के विद्यार्थियों को कम मात्रा में प्राप्त हो पाती है। यूपीएससी का सिलेबस काफी मात्रा में इतिहास विषय के ऊपर आधारित रहता है मगर गौर करने योग्य बिंदु यह  है कि इतिहास से ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट या पीएचडी किए हुए 

व्यक्ति यूपीएससी की परीक्षा नहीं निकाल पाते मगर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से शिक्षित व्यक्ति जिसने इतिहास को कभी नहीं पढ़ा वह बहुत जल्द यूपीएससी के सिलेबस को समझ इस कठिन परीक्षा को क्रैक कर ले जाता है। इसलिए ज्यादा अध्ययन करने की तुलना में महत्वपूर्ण यह होता है कि आप स्मार्ट स्टडी करें और दिमाग को शार्प बनाएं।
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